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Baba Ramdev arrested by police!!

Discussion in 'National Politics' started by JanjaWeed, Jun 5, 2011.

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  1. Bad Wolf

    Bad Wolf Major SENIOR MEMBER

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    अल्पसंख्यकवाद के बहाने देशद्रोह
    इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों के सेकुलर गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधानों का उपयोग जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने व हिन्दूविरोध के लिए इस हद तक किया जा रहा है कि अब देश की आम राष्ट्रभक्त हिन्दू जनता में यह धारणा बन चुकी है कि अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधान गद्दारी व देशद्रोह के ही पर्यायवाची हैं ।
    देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?
    लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।
    कुछ बात है के हस्ती मिटती नहीं हमारी।।
    पर यह भी सत्य है कि
    उस कौम का इतिहास नहीं होता।
    जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।
    संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।
    बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।
    आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।
    o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।
    o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।
    हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।
    o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।
    फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।
    अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?
    यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।
    दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।
    यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।
    अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।
    आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।
    अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।
    आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।
    सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?
    हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।
    अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?
    वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।
    वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।
    अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?
    o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?
    आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।
    क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।
    वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?
    मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।
    जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?
     
  2. Bad Wolf

    Bad Wolf Major SENIOR MEMBER

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    सेकुलर गिरोह का हिन्दुसिखों पर हमला
    ü आज अगर अपने देश भारत में भारतीय जीवन पद्धति की रक्षा व उसमें व्याप्त बुराईयों को दूर करने के लिए हिन्दू समाज की प्रेरणा के स्रोत परम पूजनीय गुरूओं द्वरा स्थापित संप्रदाय से सबन्धित सिख भी अपनी अलग पहचान पर जोर दे रहे हैं तो यह बहुत ही चिन्ता का विषय है क्योंकि यह इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह द्वारा भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर हिन्दुओं सिखों का खून बहाने वाले ईसाईयों व मुसलमानों को खुश करने के लिए बहुसंख्यक हिन्दुओं पर ढाये गये असहनीय अत्याचारों का ही असर है ।
    अपने देश भारत में आज अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर हिन्दुओं को मानसिक, सारीरिक व आर्थिक रूप से जिस तरह वंचित व प्रताड़ित किया जा रहा है ऐसे हालात में कौन जागरुक हिन्दू चैन से बैठ सकता है ?
    · आज अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं और हिन्दू हैं तो एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर आपकी नौकरी जा सकती है पर अगर आप मुसलमान हैं तो चाहे चार-चार शादियां करो !
    इस नियम की वजह से आज तक कई हिन्दू सरकारी कर्मचारी इस्लाम अपना चुके हैं जिसका सबसे बढ़ा प्रमाण तब मिलता है जब कांग्रेस का एक उपमुख्यमन्त्री व एक सेवादल प्रमुख हिन्दुओं पर लागु प्रतिबंध से बचने के लिए इस्लाम अपनाकर दूसरी शादी करते हैं ।
    जो लोग खुद को सैकुलर बोलते हैं वो वास्तव में सैकुलर नहीं हिन्दुविरोधी हैं और इसी हिन्दूविरोध के चलते ये गद्दार ऐसे नियम बना चुके हैं व बना रहे हैं जिससे देश में हिन्दू विरोधी हालात की वजह से हिन्दू हर तरह से प्रताड़ित हो रहे हैं ।
    · अगर आप हिन्दू हैं तो आपके द्वारा हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार व जिहादी आतंकवाद का विरोध सांप्रदायिकता है पर मुस्लिम होने पर चाहे आप इस्लाम के बहाने जिहादी आतंकवाद का प्रचार प्रसार करो या शहीदों का अपमान करो या फिर देशभक्तों का खून बहाओ सब आपका अधिकार है !
    · अगर आप हिन्दू हैं तो दो से ज्यादा बच्चे करने पर आप कई जगह चुनाव के अयोग्य ठहराये जा सकते हैं पर मुस्लिम होने पर चाहे आप जितने चाहो उतने बच्चे करो मतलब चाहे आप 50 बच्चे पैदा करो आपको खुली छूट है आपका हौसला बना रहे इसके लिए गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने घोषणा कर रखी है कि उनकी सरकार मुस्लिमबहुल जिलों का विकास करेगी क्योंकि हिन्दुबहुल जिलों से इस हिन्दुविरोधी सरकार को हिन्दूक्रांति का डर सताता है !
    · अगर आप हिन्दू हैं और आप पर अल्पसंख्यक बोले तो ईसाईयों व मुसलमानों द्वारा हमला बोल दिया जाए और आप मार खाने या मरने के बजाए विरोध करें तो अल्पसंख्यक व मानवाधिकार आयोग अल्पसंख्यक की रक्षा का प्रश्न उठाकर सरकार पर दबाव बनाकर आपको आजादी से जीने के अधिकार से वंचित कर सकते हैं।
    अगर इतने से काम न चले तो तालिबानी मीडिया का उपयोग कर देश विदेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं ऐसा चिला- चिलाकर दुष्प्रचार कर हिन्दुविरोधी माहौल बनाकर माननीय न्यायालय में झूठे साक्ष्य देकर आपकी जिन्दगी को खत्म भी करवाया जा सकता है।
    पर मुस्लिम होने पर चाहे आप हिन्दुओं को हलाल कर हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दो (जैसे कश्मीर में मिटाया व बाकी जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट कर कोशिश चल रही है),हिन्दुओं को जिन्दा जला दो, ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह आपका पूरा सहयोग करेगा सैकुलर सरकार आपको बिशेष आर्थिक पैकेज देगी और जरूरत पड़ने पर आपको माननीय न्यायालय द्वारा सुनबाइ गई सजा को रोककर आम मुसलमानों को भी आपका सहयोग करने को प्रेरित करेगी ।
    · अगर आप हिन्दू हैं और मन्दिर निर्माण की बात करते हैं तो ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह सबाल उठाएगा कि इतने लोग भूख से मर रहे हैं और आप मन्दिर की बात कर रहे हैं ।आप गरीब विरोधी हैं । अपने देश के अन्दर ही धार्मिक यात्रा के लिए तरह तरह के नाम देकर पैसे बसूले जांएगे ।
    लेकिन अगर आप मुसलमान हैं तो यही गिरोह आपको हज यात्रा के लिए 50000 रूपये प्रति मुसलमान प्रतिवर्ष देगा और यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को भी नहीं मानेगा । जेरूसलम की यात्रा के लिए भी 80000 रूपये प्रति ईसाई देगा।
    पता है क्यों ? क्योंकि ऐसा करने से शेखों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा डाले गये टुकडों से इस गिरोह की अपनी गरीबी दूर होती है ।
    · अगर आप हिन्दू हैं और संगठित होने के लिए कोई संगठन बनाते हैं तो ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह आपके संगठनों के विरूद्ध तरह-तरह के षडयन्त्र रच कर उन्हें बदनाम करने का हर सम्भव प्रयत्न करेगा उन पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश करेगा। पर अगर आप ईसाई या मुसलमान हैं तो फिर आपके संगठनों को हर तरह का सहयोग देना इस गिरोह का पहला कर्तव्य है। चाहे आप ईसाई या मुसलमान आतंकवादी संगठन ही क्यों न बनायें।
    · अगर एम एफ हुसैन जैसे मुसलमान हिन्दू देवी देवताओं को अपमानित करने के लिए उनकी नंगी तसबीरें बनाते हैं, हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं देशभक्तों को चिड़ाने के लिए भारत माता की नंगी तसबीरें बनाते हैं तो ये सैकुलर हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह इसे अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता बताकर व ऐसे गद्दारों को इनाम देकर जले पर नमक छिड़कने का काम करता है और ठीक उसी वक्त डेनमार्क में जब एक ईसाई द्वरा हजरत मुहम्मद को हाथों में बम्ब उठाकर गैर मुस्लिमों का खून बहाते हुए एक आतंकवादी के रूप में दिखाया जाता है तो यही गिरोह इसे मुसलमानों की भावनाओं से खिलबाड़ बताकर कार्टून बनाने वाले के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग उठाता है। मतलब मुसलमानों की भाबनाये भावनायें और हिन्दुओं की भावनायें अपराध !
    · जब हिन्दूसंगठन देश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध आवाज उठाते हैं तो उन्हें सांप्रदायिक कहकर अपमानित कर उनकी आवाज को दबाने का प्रयत्न किया जाता है प्रतिबन्ध की धमकी देकर उन्हें इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह की असलिएत जनता के सामने उजागर करने से रोकने का प्रयत्न किया जाता है पर इस गिरोह को हरबार मुँह की खानी पड़ती है क्योंकि देशभक्तों के ऊपर देशद्रोहियों को बचाने के लिए दबाव बनाना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।
    अगर आप सन्त हैं और हिन्दुत्व की बात करते हैं हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध हिन्दुओं को संगठित करते हैं तो आपकी हत्या करवाई जाती है आपको सांप्रदायिक माना जाता है आपको जेल में डाला जाता है आपको आतंकवादी कहा जाता है पर आप ईसाई पोप हैं तो आपके मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है !
    · आज देशभक्त हिन्दुओं के पैसे का दुरूपयोग कर ईसाई शिक्षा संस्थानों को इतनी अधिक ब्याबसायिक सीटें दी जा चुकी हैं कि वो जाली ईसाई होने का प्रमाण पत्र बनाकर ये सीटें लाखों रूपय में इन वयावसायिक कोर्सों से वंचित हिन्दुओं को बेच रहे हैं ! सरकारी नौकरियों में कार्यरत हिन्दू अध्यापकों को ईसाई संस्थानों में बच्चों को भेजने पर 50000 रूपये देने का प्रलोभन दिया जाता है ।
    · भारत में हिन्दू धर्म की शिक्षा को सांप्रदायिकता का नाम देकर विरोध किया जाता है जबकि मदरसों में कुरान व हदीस की हिंसक आयतों को पढ़ाकर हिन्दुविरोधी-देशविरोधी सोच का निर्माण ठीक ढंग से चला रहे इसके लिए सरकार बढ़चढ़कर आर्थिक सहायता देती है ईसाईयों द्वारा ईसाई स्कूलों में बाइबल पढ़ाने के बहाने हिन्दू धर्म की निंदा करने का भी न केवल समर्थन किया जाता है बल्कि आर्थिक सहायता भी दी जाती है वह भी हिन्दुओं से लिए टैक्स से।
    · अगर आप हिन्दु विद्यार्थी हैं तो आपको कर्ज लेने के लिए 13% ब्याज के साथ-साथ 15% मार्जिन मनी भी देना पड़ेगा पर आप मुस्लिम विद्यार्थी हैं तो आपको सिर्फ 3% ब्याज देना पड़ेगा और मार्जिन मनी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता सरकार आप पर 100% मेहरवान है।
    · कुल मिलाकर हिन्दू संस्कृति को बदनाम कर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बर्बाद करने के लिए वो सब किया जाता है जो औरंगजेब जैसे मुसलमानों और डायर जैसे ईसाईयों के गुलामीकाल में किया गया । कैसे कहें कि देश आजाद है ?
    पहले हिन्दू मुस्लिम जेहादीयों व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई सम्राज्यवादियों का गुलाम था अब हिन्दुविरोधी सैकुलर गद्दारों का ।
    · देश में हर बड़े पद पर मुसलमान या ईसाई को पहुँचाने का जरूरत से ज्यादा प्रयत्न कर हिन्दुओं को इन पदों से वंचित करने का लगातार षड़यन्त्र रचा जाता है इसी का परिणाम है कि देश में 80% हिन्दू जनसंखया होने के बावजूद देश हिन्दुओं को जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हमलों से बचाने में सफल नहीं हो पा रहा है। क्योंकि ऊंचे पदों पर उनके समर्थकों के बैठे होने की वजह से इन आतंकवादियों के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकती है ।
    इन्हीं के प्रभाव के चलते सरकार जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की रक्षा के लिए ज्यादा आतुर नजर आती है । मुस्लिम जेहादियों के हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान में कोई रूकाबट न आ जाये इसलिए सुरक्षाबलों में हिन्दुओं को हटाकर मुस्लिमों की संख्या बढ़ाने की बकालत की जाती है।


    हम सिखों की बात करने लगे थे पर देश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों व उनसे किए जा रहे भेदभाव से पैदा हो रहे दुःख व क्रोध ने आ घेरा और सहज ही ये घटना दिलोदिमाग पर छा गई । ये घटना उस वक्त की है जब जिहादी राक्षस औरंगजेब हिन्दुओं पर कहर बरपा रहा था, मन्दिर तोड़े जा रहे थे, मां बहन बेटियों की इज्जत से खिलबाड़ किया जा रहा था।
    तभी हिन्दुओं का एक समूह कृपा राम जी की आगुबाइ में पटना में गुरू तेगबहादुर जी के पास पहुँचा व उनसे जिहादी राक्षस औरंगजेब के अत्याचारों से बचाने की गुहार लगाई और गुरू जी को बताया कि इस राक्षस ने हिन्दुओं को इस्लाम या मौत में से किसी एक को चुनने की धमकी दी है। इस राक्षस के समर्थकों का समूह जहां भी पहुँच रहा है वहां पर हिन्दुओं पर हर तरह के अत्याचार ढाने के बाद उनको हलाल किया जा रहा है जब ये सब कुछ हिन्दू गुरू तेगबहादुर जी को बता रहे थे उस वक्त उनका बेटा जो कि अभी बहुत छोटा था ये सब सुन रहा था तभी गुरूजी ने उन हिन्दुओं को उत्तर दिया कि हमारे पास कोई सेना तो है नहीं जो हम उस दुष्ट राक्षस से युद्ध कर सकेँ फिर भी आप मेरे पास आए हैं तो हम आपकी सहायता तो जरूर करेंगे । आप उस जिहादी राक्षस औरंगजेब से जाकर कह दो कि हमारा एक गुरू है गुरू तेग बहादुर जी अगर वो अपना धर्मबदल कर इस्लाम अपना ले तो हम सभी एक साथ इस्लाम अपना लेंगे ।
    जब हिन्दुओं ने यही सबकुछ जाकर उस जिहादी राक्षस औरंगजेब को बताया तो उसे ये जानकर आश्चर्य हुआ कि कोई धर्मजागरण का काम करने वाला व्यक्ति उस जैसे राक्षस को इस तरह ललकार सकता है ।क्योंकि वो एक कठमुल्ला था ।गुरू जी के अलौकिक ताकत व धैर्य को समझना उसके बस से बाहर था।
    इस बीच गुरू जी ने अपने योग्य पुत्र गोविन्द राय जी को गुरूपद देकर स्थापित कर दिया और स्वंयम धर्मजागरण का काम करते हुए दिल्ली की ओर निकल पड़े। कुछ ही दिनों बाद उस राक्षस के जिहादी सैनिक गुरू तेगबहादुर जी को आगरा से गिरफ्तार कर दिल्ली ले गए । दिल्ली में गुरूजी को हर तरह से सत्ताया गया। असहनीय कष्ट दिए गये ।
    इन जिहादी राक्षसों द्वारा गुरू जी पर ढाए गए जुल्मों को ब्यान करना हमारे जैसे आम हिन्दू के बस की बात नहीं क्योंकि उन जुल्मों के बारे में सुनते ही किसी भी आम व्यक्ति के या तो प्राण निकल जांयें या वो सब कुछ भूल कर इन जिहादी राक्षसों के वंशजों ब उनके समर्थकों का नामोनिशान मिटाने निकल पड़े । आप जरा गुरू तेगबहादुर जी के बारे में सोचें जिन्होंने ये सबकुछ सहा और अपने धर्म पर टिके रहे अन्त में गुरू जी हिन्दू धर्म की रक्षा की खातिर इन जिहादी राक्षसों के जुल्मों को सहते सहते अमर हो गए । अपने अंतिम सांस तक धर्म और राष्ट्र का काम करने वाले नवम गुरू तेगबहादुर जी ने सदियों से गुलामी की मार से अचेत हो चुके हिन्दूसमाज के अन्दर नई उर्जा का संचार किया ।
    बलिदान की परम्परा की तो ये शुरूआत थी आगे चल कर गुरू तेगबहादुर जी के बेटे गुरु गुरूगोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की। अपने परिवार सहित धर्म की रक्षा की खातिर जिहादी राक्षसों से लोहा लेते रहे । गुरूगोबिन्द सिंह जी के दोनों छोटे बेटों शहीद जोरावर सिंह जी व शहीद फतेह सिंह जी को इन जिहादी राक्षसों नें सरहिन्द की दीवारों में चुनवा दिया । इन जिहादी राक्षसों ने गुरू गोबिन्द सिंह जी की माता जी को भी शहीद कर दिया । गुरू गोबिन्द सिंह जी भी अपने दोनों बड़े बेटों शहीद अजीत सिंह जी व शहीद जुझार सिंह जी सहित इन जिहादी राक्षसों के साथ धर्म की रक्षा की खातिर लड़ते-लड़ते शहीद हुए ।
    अब सोचने वाला विषय ये है कि जो लोग इन गुरू साहिबान को सिर्फ सिखों के गुरू बताते हैं क्या वो सही हैं नहीं बिल्कुल नहीं ये गुरू साहिबान न केवल सिखों के बल्कि पूरे हिन्दू समाज के गुरू हैं, सब भारतीयों के गुरू हैं और जो भी इन्हें गुरू मानने से इन्कार करता है उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं ।
    सोचने वाला विषय यह भी है कि इतने बलिदानों के बावजूद ये हिन्दू समाज इन आदमखोर अल्लाह के राक्षसों का नामोनिशान मिटाने में क्यों असफल रहा । वजह बहुत साफ है जिस तरह आज 20वीं और 21वीं शताब्दी में भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रचार प्रसार कर हिन्दूराष्ट्र भारत में धर्म की रक्षा के लिए संघर्षरत हिन्दुओं व उनके संगठनों पर मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे हमलों का खुल्लम-खुल्ला समर्थन व सहयोग कर ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह हिन्दूसमाज को दगा दे रहा है ठीक इसी तरह हर शताब्दी में कोई न कोई सैकुलर गद्दार जयचन्द के रूप में जन्म लेकर हिन्दूसमाज को दगा देता रहा ।
    प्रश्न यह भी पैदा होता है कि जिन सिखों ने धर्म की रक्षा के लिए पानी की तरह अपना खून बहाया,जिन सिखों के साथ हिन्दुओं का रोटी-बेटी का रिश्ता है,जिन हिन्दुओं-सिखों का खून एक है जिनके गुरू एक हैं जिनके पूर्वज एक हैं उनके बीच के खून के रिश्तों को आग किसने लगाई ?
    कौन लगा सकता है इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के सिवा । जी हां इसी गिरोह के एक ऐसे सहयोगी जिसकी स्थापना एक विदेशी अंग्रेज द्वारा हिन्दुओं को आपस में लड़वाकर विदेशियों का हित साधने के लिए की । जो आज भी भारत को एक विदेशी का गुलाम बनवाकर हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए हर तरह के षड्यन्त्र रच रहा है। जिस तरह आज महाराष्ट्र में शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने राज ठाकरे को आगे बढ़ाकर मराठी गैर मराठी के नाम पर हिन्दुओं को आपस में लड़वा दिया ठीक इसी तरह 80 के दशक में पंजाब में अकालियों को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने भिंडरावाले को आगे बढ़ाकर हिन्दू-सिखों को आपस में लड़वा दिया था।
    जो कसर रह गई थी वो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेसियों व उनके सहयोगी मुस्लिम गुंडो द्वारा सिखों के कत्ल कर पूरी कर दी गई । सिखों में अलगाववादी तत्वों द्वारा कांग्रेसियों द्वारा किए गये कत्लेआम के लिए हिन्दुओं को जिम्मेवार ठहराकर हिन्दुओं व उनके संगठनों के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार कर कोंग्रेसियों के षड़यन्त्र को काफी हद तक सफल होने का मौका दिया ।
    ये तो भला हो गुरू साहिबान के उन सच्चे सिखों का जिन्होंने मुसीबत की इस धड़ी में गुरूओं की शिक्षाओं को न भुलाकर और उन हिन्दुओं व उनके संगठनों का जिन्होंने गुरू साहिबान के द्वारा हिन्दूधर्म की खातिर किए गये बलिदान का कर्ज चुकाकर हिन्दुओं व हिन्दू कार्यकर्ताओं का कत्ल होने के बावजूद न खुद सिखों पर हमला किया न हमलों का समर्थन किया और जहां तक सम्भव हो सका अपने खून के रिश्ते की लाज रख सिखों को बचाया।
    यदि कांग्रेस सिखों को कमजोर करने के लिए भिंडरावाला पैदा न करती तो न आपरेशन बल्यूस्टार होता न इन्दिरा जी का कत्ल होता न दंगे होते न हिन्दू-सिखों में अविश्वाश बढ़ता । पर इस कांग्रेस को कौन समझाय कि जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है उसके लिए कूँआ पहले ही तैयार होता है ।
    सिखों को भी समझना चाहिए कि जैसे इंदिरा का कत्ल होने के बाद सिखों का खून बहाया गया घर जलाए गये ठीक इसी तरह मोहन दास जी की हिन्दुविरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप उनका कत्ल होने के बाद इसी कांग्रेस ने हिन्दुओं के ऊपर हमले किए थे, उनके घर जलाए थे । इस लिए कांग्रेस न केवल सिखों की बरबादी का कारण है बल्कि हिन्दुओं की बरबादी के लिए भी जिम्मेवार है । सिखों पर तो इन कांग्रेसियों ने सिर्फ एक बार हमला बोला था हिन्दुओं पर तो ये हमला आज तक जारी है ।

    छतीसिंहपुरा में मुस्लिम जिहादयों द्वारा सिखों का कत्ल

    अब हिन्दूसिखों को यह समझना चाहिए कि सिख हिन्दुओं की जरूरत हैं और हिन्दू सिखों की जरूरत हैं जिस तरह महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, महारानी लक्ष्मीबाई जैसे क्राँतिकारी धर्म की रक्षा के लिए लड़ते लड़ते शहीद हुए ठीक उसी तरह गुरू अर्जुन देव जी, गुरू तेगबहादुर जी, गुरू गोबिन्द सिंह जी व उनके बेटे भी धर्म की रक्षा की खातिर लड़ते लड़ते शहीद हुए । शत्रु भी सबका एक ही था आज भी है वो है मुस्लिम जिहादी आदमखोर अल्लाह का विचार और इस विचार के समर्थक व उसके सहयोगी ये सैकुलर गद्दार।
    हम सबने देखा कि किस तरह कश्मीर घाटी में भी हिन्दू सिख इस जिहादी मानसिकता का एक साथ शिकार हुए। इस देशद्रोही गिरोह के षड्यन्त्रों में फंसकर सारे भारत के हिन्दू-सिख एक साथ संगठित होकर युद्ध करने के बजाए आपस में छोटी-छोटी बातों पर बंटकर इस मुस्लिम जिहादी आदमखोर मानसिकता का काम आसान बनाते रहे । कामोबेश यही स्थिति सारे भारत में दिख रही है ।
    हम तो कहते हैं अभी भी देर नहीं हुई है हम सब हिन्दूसिखों को एक साथ मिलकर इन मुस्लिम जिहादियों व उनके समर्थक इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का नामोनिशान इस गुरूओं की भूमि भारत से मिटाने के लिए अखिलभारतीय स्तर पर क्राँति का सूत्रपात कर खालसा पंथ के मूल उदेशय को पूरा करने की राह पर निकलना चाहिए। अन्यथा हम सब के साथ सारे भारत में वही होगा जो कश्मीर घाटी में हुआ ।
    आज कश्मीर घाटी के वो जिहादी जो कश्मीर घाटी में हिन्दुओं व सिखों पर हुए अत्याचारों के गुनाहगार हैं। सारे भारत में किसी न किसी काम का बहाना लेकर बेखौफ घूम रहे हैं। मुस्लिम जिहादी आदमखोर मानसिकता व गोला बारूद का बिस्तार सारे भारत में कर रहे हैं। बेसमझ हिन्दू-सिख उनको उनके किए की सजा देने के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और हिन्दुओं-सिखों व सैनिकों के खून से लथपथ समान खरीदकर इन जिहादियों को और ताकतवर बना रहे हैं । इससे बड़ी बेवकूफी और क्या हो सकती है ?
    जागो ! हिन्दू जागो !
    अफगानिस्तान पाकिस्तान बांगलादेश सब हिन्दुविहीन हो गए।
    अब कश्मीर आसाम को हिन्दुविहीन घोषित करने की तैयारी है।।
    आज जिहादी हमलों में वो घरबार परिवार सहित मारे गए।।।
    कल हमारी फिर हमारे बच्चों को मारने की तैयारी है।।।।
    जिस तरह सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों से भरा पड़ा है ठीक इसके विपरीत जिहादी मुसलमानों का इतिहास हिन्दुओं-सिखों पर किए गये अत्याचारों व इस देव भूमि भारत से धर्म का नामोनिशान मिटाकर मुस्लिम जिहादी आदमखोर अल्लाह का राक्षसी राज्य स्थापित करने के दुस्साहसों से भरा पड़ा है !
    फिर क्या वजह है कि जो कांग्रेसी उन सिखों का खून बहाने व उन क्राँतिकारियों का अपमान करने का पाप करतें हैं जिनकी कुरबानियों की वजह से हिन्दू आज तक इन जिहादी राक्षसों का शिकार होने से बचे हैं व अपनी सभ्यता संस्कृति को बचाने में कुछ हद तक सफल हुए हैं।
    पर वही काँग्रेसी उन जिहादी राक्षसों के लिए हिन्दुओं का खून बहाने के लिए तैयार हो जाते है जो अगर बाकी हिन्दुओं को मारने में सफल हो जाते हैं तो अंत में इन कांग्रेसियों को भी नही छोड़ेंगे ।
    क्या इन जिहादी राक्षसों ने कश्मीर में हिन्दुओं को हलाल करते वक्त उन सैकुलर हिन्दुओं को छोड़ दिया जो हर वक्त हर हाल में इन जिहादियों को आगे बढ़ाने के लिए आतुर नजर आते हैं ? नहीं न ।
    आज भारत में जम्मू-कश्मीर ही एकमात्र राज्य है जिसमें मुसलमान निर्णायक स्थिति के करीब हैं ये धर्मनिर्पेक्षता का ड्रामा करने वाले जोकर जरा देश को बताएँ कि आज तक हिन्दुओं का कत्लेआम करने वाले कितने जिहादियों को प्रशासन द्वारा फाँसी पर लटकाया गया व कितने सैनिकों व हिन्दुओं को इन जिहादियों ने शहीद किया और 60 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आज तक कोई हिन्दू क्यों मुख्यामन्त्री न बन पाया या फिर इनकी भाषा में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक होने के नाते क्या विशेषाधिकार प्राप्त हैं ।
    ये नहीं बता सकते, हम बताते हैं उनको सिर्फ एक विशेषाधिकार प्राप्त है और वह है जिहादियों की इच्छा अनुसार हलाल होने का वो भी इन सैकुलर गद्दारों द्वारा भारतीय सेना की कार्यवाही के ऊपर तरह-तरह के अंकुश लगा देने की वजह से । यही अंकुश सैनिकों के शहीद होने की बढ़ रही संख्या का भी प्रमुख कारण वन रहे हैं ।
    एक तरफ ये गिरोह सेना के ऊपर अंकुश लगाकर देशद्रोहियों का हौसला बढा रहा है दूसरी तरफ मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाकर सेना को बदनाम करने के षड्यन्त्र रच रहा है।तीसरी तरफ देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों द्वारा आतंकवादियों के मानवाधिकारों का प्रश्न उठाकर सैनिकों पर आतंकवादियों को न मारने के लिए दबाव वनाया जा रहा है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि सेना ने देश की रक्षा करने की कसम उठाई है न कि गद्दारों द्वारा सेना पर लगाय जाने वाले अंकुशों की वजह से बिना लड़े इन जेहादायों के हाथों मरने की !
    यह वही गिरोह है जो सत्ता में आते ही सेना को भी अपनी हिन्दुविरोधी मुहिम में शामिल करने के लिए सेना में मुसलमानों की गिनती करने का आदेश देता है जिसे देशभक्त सेना विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के देशविरोधी षड्यन्त्र को असफल कर देती है ।
    यही दुस्साहस यदि किसी मुस्लिम या ईसाईबहुल देश में किया जाता तो बहाँ की सेना तख्तापलट कर ऐसे देशद्रोहियों को फांसी पर लटकाकर प्रशासन अपने हाथ में ले लेती । ये तो भारतीय सेना के संयम की इंतहा है कि सेना ने ऐसा दुस्साहस करने वाले इस देशद्रोही गिरोह को बख्श दिया । वरना आज तक देश के बिभिन्न हिस्सों में सिर उठा रहे गद्दारों व देश की रग-रग को खोखला करने में लगे भ्रष्टाचारियों के होश ठिकाने आ गए होते।
     
  3. Bad Wolf

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    भारत विरोधी भारत सरकार
    भारत विरोधी भारत सरकार
    जब से इस हिन्दुविरोधी मुस्लिम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार सत्ता में आई है तब से इसका एक ही चेहरा उभर कर सामने आता है पहले दिन से लेकर आज तक इस सरकार का एक-एक काम चीख-चीख कर कह रहा है कि इस सरकार का एक मात्र मकसद येनकेन प्रकारेण भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तबाहकर हिन्दुओं को मरवाकर मुस्लिम जिहादियों और धर्मांतरण के ठेकेदारों का सहयोग लेकर देश को एक ऐसी दिशा देना है। जिसका एकमात्र परिणाम गृहयुद्ध है।
    गृहयुद्ध में विदेशी सहायता लेकर हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाकर इस एंटोनिया माइनो मारियो को देशभक्त हिन्दुओं द्वारा प्रधानमन्त्री न बनने देने का बदला लेकर व भारत विरोधी ताकतों के षड्यन्त्र को पूरा कर देश में मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का आदमखोर राक्षसी राज्य स्थापित करना है अगर आपको इस बारे में कोई शंका है तो अगले कुछ पन्नें जिन पर हम इस सरकार के सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के सांप्रदायिक निर्णय लिखेँगे जो न केवल आपका भ्रम दूर कर देंगे बल्कि आपको यह भी स्पष्ट कर देंगे कि ये हिन्दूविरोधियों का गिरोह जो सैकुलर होने का दावा करता है वो इस देश का अति सांप्रदायिक गिरोह है।
    ये देश की पहली सरकार है जिसके सभी बड़े पदों पर खुद को भारतीय के बजाए अल्पसंख्यक कहने में गर्व महसूस करने वाले बैठे हैं इस गिरोह की प्रमुख एंटोनियो माइनोमारियो विदेशी अंग्रेज ईसाई जिसके पी ए के रूप में प्रधानमंत्री नियुक्त हुआ है और गुलामी में देशविरोधी काम करने को मजबूर है एंटोनियो के कोर ग्रुप में या तो ईसाई हैं या मुसलमान । सरकार का एक महत्वपूर्ण पद रक्षा मंत्रालय हिन्दू प्रणव मुखर्जी जी के पास था जिसे छीन कर ईसाई ए के एंटनी के पास दे दिया। रही गृह मंत्रालय की बात तो उसके बारे में सारे देश को विश्वास हो चुका है कि उसे स्वांय एंटोनिया चला रही हैं ।
    कुल मिलाकर इस सरकार को हम देश की पहली अल्पसंख्यक सरकार कह सकते हैं जिसके द्वारा बहुसंख्यक देश के असली मालिक हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों को देख कर कलेजा मुँह को आता है इस देशद्रोही अल्पसंख्यक सरकार ने हिन्दुओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के जो प्रयत्न किए सो किए इसने तो भारतीय सेना तक को न बख्शा ।
    आज तक किसी देशभक्त सरकार ने सेना में मुसलमानों या ईसाईयों की संख्या धटाने की कोशिश तो दूर बात तक नहीं की जो कि जिहादियों द्वारा सेना व हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती थी । लेकिन इस सरकार ने सेना में हिन्दुओं की संख्या घटाने का दुस्साहस किया जो कि सेना ने ठुकराकर देश को इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के विनाशकारी षड्यन्त्र से बचा लिया। जिसकी वजह से आज लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकाँत पुरोहित जी को काल्पनिक घटनाओं में फंसाकर सेना को कटघरे में खड़ा करने का दुस्साहस किया जा रहा है।
    ये बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती सोचने वाला विषय यह है कि सरकार को देशभक्त हिन्दुओं से डर क्यों लगा ? क्यों सरकार को ऐसा लगा कि देश की रक्षा करने वाली सेना उसके लिए खतरा है ।क्योंकि किसी भी देश की सेना तो उस देश की देशभक्त सरकार की रीढ़ की हड्डी होती है लेकिन किसी भी देशद्रोही सरकार के लिए खतरा !
    · सरकार ने सत्ता मे आते ही देशभक्त हिन्दुओं व सुरक्षाबलों के खून के प्यासे जिहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए आतंकवाद विरोधी कठोर कानून हटा दिया।आज इस सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं देश में आतंकवाद अपने चरम पर है पर सुरक्षाबलों के पास आज भी कोई कारगर कानून नहीं है। जिसकी वजह से एक तो आतंकवादी अपनी इच्छा अनुसार हमला कर रहे हैं और उनके सहयोगी व ये सेकुलर गिरोह आतंकवादियों द्वारा मारे गये हिन्दुओं को जायज ठहराने के लिए कभी कह रहे हैं ये मुसलमान गरीब हैं कभी कह रहे हैं ये अनपढ हैं कभी कह रहे हैं ये हिन्दुओं द्वारा सताए हुए हैं।
    पोटा हटाने के लिए भी यही तर्क दिया गया कि ये हम मुसलमानों को बचाने के लिए कर रहे हैं। ये सब तर्क ये धारणा बनाते हैं कि सब के सब मुसलमान जिहादी आतंकवादी हैं बेशक सरकार मानती हो कि सच्चाई यही है फिर भी हमें समझना चाहिए कि बेशक सारे के सारे जिहादी आतंकवादी मुसलमान हैं पर सारे मुसलमान जिहादी आतंकवादी नहीं हैं। क्योंकि मुसलमान अल्लाह को मानते हैं भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं नमकहलाल होते हैं जबकि जिहादी आतंकवादी आदमखोर जिहादी अल्लाह को मानते हैं औरंगजेब बाबर के समर्थक गद्दार और नमकहराम हैं । जो कि न अनपढ हैं न गरीब हैं क्योंकि ये जिहादी कोई डाक्टर है तो कोई इंजिनियर ।
    अब रही बात मुसलमानों को हिन्दुओं द्वारा सताए जाने की तो एक तो जिहादी आतंकवादियों द्वारा किए गये हमलों में मारे जाने वाले 95% हिन्दू हैं क्योंकि योजनाबद्ध ये सारे हमले हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में किए जाते हैं दूसरा ये जिहादी इस्लाम के नाम पर देश के तीन-तीन टुकड़े करवा कर उन पर कब्जा कर चुके हैं अब अखण्ड भारत का छोटा सा हिस्सा सिर्फ भारत ही हिन्दुओं के लिए है अब इसमें भी इस्लामी राज्य बनाने के लिए ये जिहादी कत्लोगारद मचा रहे हैं ऐसे में आप खुद फैसला करें कि कौन किसका सत्ताया हुआ है ।
    ये तो बिल्कुल वैसा ही है कि किसी के घर में घुसकर उस पर हमला करना मारकाट मचाना उसके द्वारा प्रतिरोध करने पर शोर मचा देना कि घर का मालिक हमें सत्ता रहा है इसे घर से बाहर निकालकर सजा दो।
    जब हिन्दू राष्ट्र भारत में ये स्थिति है तो जरा चिंतन करें कि हिन्दू दुनिया में कहां सुरक्षित है ?

    · इस सरकार ने सत्ता में आते ही आतंकवादियों से संघर्ष में शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों के परिवारों को मिलने वाली विशेष आर्थिक सहायता ये कहकर बंद कर दी कि सरकार के पास पैसे की कमी है और सुरक्षाबलों द्वारा मारे गये जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना शुरू कर दी तब पैसा कहां से आया । वास्तव में कमी पैसे की नहीं, नीयत में खोट है सरकार की नीयत जिहादी आतंकवाद को बढ़ावादेने की है। न तो नीयत साफ है न नीति ।
    · सरकार ने मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा चलाए जाने वाले शिक्षा संस्थानों को कानून के नियन्त्रण से बाहर कर उन्हें देशविरोधी हिन्दुविरोधी एजंडे को लागू करने की खुली छूट दे दी।
    · सरकार ने सांप्रदायिक आधार पर मुसलमानों और ईसाईयों के बच्चों के लिए छात्रवृतियां देने की शुरूआत की जो कि हिन्दुओं के बच्चों के साथ अन्याय है क्या इन बच्चों का कसूर ये है कि ये हिन्दू हैं ? जरा सोचो सांप्रदायिक आधार छात्रवृतियों से वंचित ये बच्चे जब बड़े हो जांयेगे तो इनकी मानसिकता क्या होगी ?
    · सरकार द्वरा घोषणा की गई कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भारत के बाकी तीन हिस्सों अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांगलादेश में भी पहला अधिकार मुसलमानों का ही है तो फिर हिन्दुओं का पहला अधिकार कहां है ? हिन्द महांसागर में डूब मरने का या जिहादी राक्षसों के हाथों हलाल होने का कश्मीरघाटी की तरह!
    · सरकार द्वारा ये भी कार्यक्रम बनाया गया कि मुस्लिम बहुल जिलों का प्राथमिकता के आधार पर विकास किया जाएगा तो क्या ये माना जाये कि हिन्दुबहुल जिलों का पूरी तरह विकास हो चुका है और इतने अधिक विकास की वजह से हिन्दू किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं या फिर यह माना जाए कि हिन्दुओं ने परिवारनियोजन को राष्ट्रहित में अपनाकर अपराध किया है ?
    · माननीय उच्च न्यायालय द्वरा हजयात्रा के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को गैर कानूनी घोषित किए जाने पर सरकार का तिलमिलाना व माननीय सर्वोच्च न्यायलय में अपील कर इस सांप्रदायिक अनुदान को जारी रखने की अपील को क्यों भेदभाव करने वाला कदम न माना जाए ।
    क्या सरकार हिन्दुओं को चारधाम की यात्रा के लिये 50000रूपये प्रतिव्यक्ति अनुदान देती है ? क्या सिखों को स्वरणमन्दिर की यात्रा के लिए अनुदान देती है ? वैसे भी हिन्दुओं द्वरा टैक्स के रूप में दिए गये अपनी खूनपसीने की कमाई को इस तरह बरबाद करना वो भी जिहादी मानसिकता के विकासके लिए और आमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों से पंजीकरण शुल्क व जम्मूकश्मीर सीमा पर टैक्स वसूलना हिन्दुविरोधी मानसिकता नहीं तो और क्या है ? अगर आपको भरोसा नहीं तो सी.ए.जी. की रिपोर्ट पढ़ो।
    New Delhi: The Comptroller and Auditor General of India has come down heavily on the Ministry of External Affairs for sending extravagant, cumbersome goodwill delegation to Saudi Arabia every year . The CAG says this spending is in "disregard for economy in public expenditure."
    · The Centre sends a Haj goodwill delegation of more than 30 people for 18-20 days to Saudi Arabia every year to promote goodwill between the two countries.
    इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि साउदीअरब आज भारत विरोधी सब जिहादी आतंकवादियों की शरणस्थली बना हुआ है और भारत में हिन्दुओं व सुरक्षाबलों का खून बहाने वाले जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को अधिक से अधिक धन उपलब्ध करवाकर भारत में आदमखोर जिहादी अल्लाह का सम्राज्य बनाने के लिए प्रयासरत है।जिस सांप्रदायिक देश में चर्च या मन्दिर बनाने तक की इजाजत नहीं क्या उस देश में हिन्दूराष्ट्र भारत जैसे देश, जहाँ किसी पूजा के स्थान को बनाने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं, के नागरिकों को वो भी हिन्दुओं के पैसे से भेजकर जिहादी कट्टरता आयात करना व भारतीयों के जानमाल को खतरे में डालना उचित है ?

    · "The Ministry has not established the goodwill functions to be performed by the members of the delegation through which the fulfilment of the intended objectives is ensured," the CAG said in his report.
    महानिदेशक जी ये क्या कह रहे हैं, क्या आपको नहीं पता इस देश से हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाना ही एकमात्र गुडविल फंक्शन है अगर आपको बता दिया और हिन्दुओं को पता लग गया तो भेद खुल जाएगा और अगर भेद खुल गया तो इन मुस्लिमप्रस्तों की खैर नहीं !
    · It also said the component-wise analysis of the total expenditure of Rs 2.39 crore incurred on one of the goodwill delegations (Haj-2006 II) disclosed that while the airfare accounted for Rs 12.85 lakh and the daily subsistence allowance to the members was Rs 12.12 lakh , other local expenditure aggregated Rs 2.14 crore.
    · The CAG report also said examination of the documents in the MEA and in the Mission at Jeddah disclosed that the leader of the delegation holds a few meetings with the local dignitaries and officials.
    · "Only two-three other members of the goodwill delegation are associated with these meetings and the dinner. Other members have no role in promotion of goodwill," it said.
    · The total expenditure on Haj delegation 2006-II was Rs 2.39 crore and at this rate, the expenditure on each member of the delegation works out to a massive Rs 8.85 lakh for Haj 2006-II.
    ये 9,00,000 रूपये प्रति व्यक्ति तो सिर्फ यात्रा का प्रबन्ध करने के लिए जाने वाले सरकारी अमले का खर्चा है असली खर्चा लगभग 50000रू प्रति व्यक्ति यात्रा के दौरान किया जाना है ।
    जागो ! हिन्दू जागो !

    हिन्दू जानना चाहता है कि कितने ईसाई या मुस्लिम देशों में हिन्दुओं को वहां पर अल्पसंख्यक होने के नाते वो सब सुविधायें मिलती हैं जो भारत में हिन्दुओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित कर इन ईसाईयों और मुसलमानों को दी जाती हैं?
    सरकार क्या बताएगी संसार के अधिकतर देशों में हिन्दुओं को दोयम दर्जे के नागरिक की तरह रखा जाता है उन्हें मन्दिर तक नहीं बनाने दिये जाते, कई देशों में उन्हें मृत्यु के बाद अपने परिजनों तक को जलाने तक की इजाजत नहीं।
    अब आप ही बताओ कि सब जगह हिन्दू ही क्यों भेदभाव सहे कम से कम हिन्दुस्थान में तो ये भेदभाव नहीं होना चाहिए । हम भारत के हिन्दू सिर्फ इतनी मांग कर रहे हैं कि हमें बेशक विशेषाधिकार न दिये जाँए पर कम से कम हमें हमारे बच्चों को इस आधार पर अपने अधिकारों से तो न वंचित किया जाए कि हम हिन्दू हैं भारत में तो कम से कम ये सब नहीं होना चाहिए ।
    हमारी ये बात मानना तो दूर हमारे अधिकारों के लिए माँग उठाने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों को ये गिरोह साँप्रदायिक, आतंकवादी, फासिस्ट कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर रहा है और कातिल जिहादियों को अपना भाई । हमारी मौत तक को ये गठबन्दन जायज ठहरा रहा है । अब आप ही बताओ इन सब हालात मे हमें अपना हक दिलवाने के लिए व इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों से रक्षा करने के लिए कोई हिन्दू हथियार उठा ले तो फिर हम सब हिन्दू उसका साथ क्यों न दें ?
    · आज स्वामी रामदेव जी ने योग व आयुर्वेद को हर देशभक्त भारतीय के जीवन का अभिन्न अंग बनाकर उनके जीवन स्तर में वो सुधार ला दिया है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था । स्वामी रामदेव जी का यह अभियान अमीर-गरीब सबके लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है और हर देशभक्त भारतीय के अन्दर राष्ट्रभक्ति की वो ज्वाला पैदा कर रहा है जो गद्दारी व भ्रष्टाचार को जलाकर राख कर देने की ताकत रखती है ।आगे चलकर स्वामी रामदेव जी सब देशभक्त संगठनों के प्ररणा स्रोत वनने वाले हैं ।
    स्वामी रामदेव जी द्वारा भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार से तंग आकर इस देशविरोधी हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने स्वामी रामदेव जी के देशहित में किए जा रहे कार्यों को रोकने के लिए उनके ऊपर वृंदा करात के नेतृत्व में हमला बोल दिया ।
    ये वृंदा करात वहीं हैं जो उस वांमपंथी विचारधारा से सबन्ध रखती हैं जो अफगानिस्तान व अन्य देशों मे ईसाई अमेरिका द्वारा मुस्लिम जिहादियों को कतलोगारद से रोकने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों का विरोध करती है। वाममार्गी विचारधारा सारे भारत में राष्ट्रबाद व भारतीय-संस्कृति और सभ्यता का हर स्तर पर विरोध करती है, हर बक्त अपने भारत के विरूद्ध लड़ती रहती है। हमें हैरानी होती होती कि जो विचारघारा चीन में हर तरह से अपने राष्ट्र को सर्वोपरि मानती है वही विचारधारा भारत में देशद्रोह का मार्ग कैसे अपना लेती है ?
    हम तो कहते हैं इन भारतीय वामपंथियों को वाममार्गी विचारधारा का सही ज्ञान ही नहीं । भारत में ये बात तो वामपंथ की करते हैं इनका असली काम भारतीयों को भाषा,क्षेत्र, जाति और हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर लड़वाने का है जिसका जवलंत उदाहरण सिंगूर में इनके द्वारा गरीब किसानों की भूमि पर गोली के बल पर गुंडागरदी द्वारा किया गया कब्जा है। उन किसानों पर मार्कशवादी गुण्डों ने क्या-क्या अत्याचार नहीं किए । तभी तो आज भारत में नक्सलवादी व माओवादी हिंसा का केंन्द्र इनके द्वारा शासित प्रदेशों के आस-पास ही नजर आता है।
    इसी हिंसा के समर्थक होने की वजह से नेपाल में कातिल माओवादियों को सत्ता में बिठाने के लिए ये मध्यस्ता करते हुए पकड़े जाते हैं हमें हैरानी होती है उन माता-पिता जी की प्रतिक्रिया के बारे में सोचकर जिन्होंने अपने पुत्र का नाम सीता-राम रखा होगा कितने आस्तिक होंगे वो माता-पिता । क्या-क्या उमीदें लगाई होंगी उन्होंने अपने इस हिन्दूपुत्र से जो आगे चलकर उसी मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वालों के साथ खड़ा नजर आया और मानवता के शत्रु जिहादियों का पक्ष लेने वाले देशद्रोही गिरोह का हिस्सा बना । पिछले दिनों इसी विचारधारा के अनजान ने हिन्दू साधु-सन्तों के बारे में ऐसी टिप्पणी की कि अगर वहां पर कोई अपने जैसा हिन्दू बैठा होता तो वहीं पर खत्म कर देता ऐसे दुष्ट हिन्दुविरोधी गद्दार को ।
    खैर स्वामी रामदेव जी ठहरे घोर राष्ट्रवादी व कौमनष्ट ठहरे पक्के राष्ट्रविरोधी दोनों का मेल कैसे हो सकता है ? शायद अपने इसी राष्ट्रविरोधी वोटबैंक को पक्का करने के लिए स्वामी जी पर हमला बोला गया । हर तरह के मनघड़ंत आरोप लगाने शुरू कर दिए गये । उनको बदनाम करने के लिए सरकारी तन्त्र का दुरूपयोग कर कई षड्यन्त्र रचे गये। ये स्वामी रामदेव जी के प्रति देशभक्त जनता का अटूट विश्वास व भगवान की अपार कृपा थी जिसके कारण इन राक्षसों का कोई षड्यन्त्र सफल न हो पाया । धर्मप्रचार के काम में लगे स्वामी जी पर इस देशद्रोही गिरोह का ये हमला हमें जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे बम्ब हमलों का बौधिक स्वरूप दिखाई देता है।
    · बापू आशा राम के विरूद्ध रचे गए षड्यन्त्र की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए क्योंकि बापू आशा राम जी का काम भी धर्मांतरण के दलालों को अपने रास्ते में रूकावट की तरह खटता है हो न हो उनको बदनाम करने में इस हिन्दुविरोधी धर्मांतरण समर्थक गिरोह का हाथ जरूर निकलेगा।
    · समय-समय पर सांई राम के बारे में भी इसी हिन्दुविरोधी गिरोह का एक वर्ग अफवाहें फैलाता रहता है ।
    · हाल ही में श्री-श्री रविशंकर जी को भी विवादों में घसीटने की कोशिश की गई ।
    · इस सरकार द्वारा हिन्दू साधु सन्तों पर हमला करना व उनको बदनाम करना कोई नयी बात नहीं है आपको याद होगा कि कुछ वर्ष पहले हिन्दुओं को चिड़ाने के लिए दीवाली के शुभ अवसर पर इस सरकार ने स्वामी जयेन्दर सरस्वती जी को गिरफ्तार किया जिन्हें बाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर छोड़ना पड़ा।
    ये वो सरकार है जो मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को तो नकारती है पर पोप के मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित करती है।
    · भारत तो भारत इस भारत विरोधी सरकार ने विदेशों में भी हिन्दुविरोधी षड्यन्त्र रचे। जिसका ताजा और स्पष्ट उदाहरण नेपाल है । इस सरकार के सत्ता में आते ही नेपाल में धर्मपरायण हिन्दुओं पर चीन समर्थित माओवादियों के हमले तेज हो गये । हिन्दूराष्ट्र नेपाल ने इस हिन्दुविरोधी हिंसा से निपटने के लिए हथियारों की मांग की जो इससे पहले की सरकारें देती रहीं थीं ।
    लेकिन इस सरकार ने देशहित को दरकिनार कर हिन्दूविरोध को सर्वोपरि मानकर हिन्दूराष्ट्र नेपाल को हथियार देने से मना कर दिया। परिणामस्वरूप संसार के मानचित्र से दुनिया का एकमात्र हिन्दूराष्ट्र गायब हो गया और इसकी जगह हजारों हिन्दुओं के खून के दोषी माओवादियों के नेतृत्व में माओवादी नेपाल ने ले ली । जिसे इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने अपनी विजय के रूप में प्रचारित किया।
    · ये वही सरकार है जो अपने हिन्दुविरोधी ऐजंडे को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है जिसकी पोल तब खुल जाती है जब हिन्दुविरोधी हर लेखक को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के बहाने समर्थन देने वाली व पुरस्कृत करने वाली यह सरकार इस्लाम की सच्चाई को उजागर करने वाली लेखिका तसलीमा नसरीन को पहले तो भारत में ही बंदी बना लेती है, जिहादियों के हमलों से नहीं बचाती है और अंत में उसे भारत से बाहर निकाल देती है !
    · ये देश के विभाजन के बाद पहली सरकार है जिसने बजट को भी संप्रदाय के आधार पर बनाया मतलब मुसलमानों के लिए अलग बजट और हिन्दुओं के लिए अलग बजट । ऐसा सांप्रदायिक बजट 1947 में बनाया गया था जिसके बाद देश का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन हो गया था।
    जागो ! हिन्दू जागो !
    भारत के संविधान में सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण वर्जित है फिर देखो तुम्हें ये कितना सम्मान देते हैं।
    क्यों तुम हिन्दुओं के बच्चों को बेरोजगार कर भूखा मारने पर तुले हो ? क्यों तुम हिन्दुओं की जान लेने पर तुले हो एक तरफ जिहादियों से मरबा रहे हो दुसरी तरफ खुद हिन्दुओं के मुंह का निवाला छीन रहे हो ? एक साथ जहर क्यों नहीं दे देते ?
    कभी कहते हो भगवान राम हुए ही नहीं फिर कहते हो राम सेतु भगवान राम ने ही तोड़ दिया इतनी गद्दारी से मन नहीं भरता तो एक तरफ हिन्दुओं को हलाल करने वालों को बचाने के लिए पोटा हटाते हो और माननीय सर्वोच्चन्यायलय से सजा प्राप्त जिहादी को फाँसी देने के बजाए पालते हो लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को बचाने के लिए गद्दार परजीवी लेखकों व देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों के द्वारा मोमबती जलाओ अभियान चलाते हो ।
    दूसरी तरफ हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा के लिए संघर्षरत हिन्दू संगठनों, भारतीय सभ्यता संस्कृति की रक्षा में लगे साधु-सन्तो को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए षड्यन्त्र रचाते हो और इस गद्दारी की दौड़ में तुम देश की सुरक्षा की गारंटी सेना पर भी कीचड़ उछालते हो इस सब में तुम देशभक्तों के हाथों लिखी अपनी मौत को क्यों भूल जाते हो ?
    हिन्दूओ तुम कब तक मार खाओगे ? कब तक पिटते रहोगे ? कब तक धोखा खाते रहोगे इन हिन्दूविरोधियों से ? कब तक गिड़गड़ाओगे इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के आगे ? कब तक देश के टुकड़े होने दोगे ? कब तक इन गद्दारों के झूठ पर भरोसा कर अपने लिए शहीद होने वाले बलिदानियों के साथ खड़े न होकर चुपचाप उनके बलिदान होने का तमाशा देखोगे ?
    कब तक अपने क्राँतिकारियों के शहीद होने पर सिर्फ नारे लगाकर किनारे पर खड़े रहोगे, कब तक अपनी मां को अपमानित करने वालों का साथ देते रहोगे ? कब तक भागते रहोगे ? कहां तक भागोगे ?
    इन गद्दारों ने जिहादियों के साथ मिलकर अफगानिस्तान बनवा दिया आप भागकर भारत आ गये । इन सेकुलर गद्दारों ने आदमखोर अल्लाह के सैतानों के साथ मिलकर पाकिस्तान बांगलादेश बनवा दिए, आप भागकर भारत आ गये ,अब जब भारत ही नहीं बचेगा तो कहां जाओगे ?
    अभी तो गैर हिन्दुओं की अवादी 25% से कम है। तब इस गद्दारों के गिरोह का हिन्दुओं पर इतना जोरदार हमला है। जब ज्यादा हो जाएगी तो ये गिरोह मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के साथ मिलकर हिन्दुओं व उनकी संस्कृति का ठीक उसी तरह सफाया कर देंगे जिस तरह इन्होंने कश्मीर घाटी व उतर-पूर्व के कई राज्यों में किया और आसाम व देश के कई अन्य हिस्सों में कर रहे हैं !
    कायरों की तरह तिल-तिल कर मरने से एक बार बहादुरों की तरह लड़कर मरना आत्मा को शांति देता है । मेरे प्यारे शांतिप्रिय हिन्दूओ अभी वक्त है कूद पड़ो जंगे मैदान में मिटा डालो इन मानवता के शत्रुओं को वरना हाथ मलते रह जाओगे ।
    अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वो गलती न करना जो आपने 9वीं व 20वीं शताब्दी में की थी । इस बार जो युद्ध हम भारतीयों पर इन गद्दारों के गिरोह द्वारा थोपा गया है, अगर आगे बढ़ता है ,जिसकी पूरी सम्भावना है तो ये युद्ध निर्णायक व अन्तिम होना चाहिए एक भी गद्दार देशद्रोही आतंकवादी या उसका समर्थक जिन्दा नहीं बचना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई आदमखोर जिहादी अल्लाह या उसका वंशज हिन्दुओं की ओर आँख न उठा सके व न ही कोई जयचन्द उसका साथ देने का दुस्साहस कर सके।
    · इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम हुए ही नहीं हैं वो काल्पनिक हैं क्योंकि इस सरकार ने उन्हें नहीं देखा है।
    हम इस सरकार व सरकार के इस विचार का समर्थन करने वालों से पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने दादा के दादा को देखा है अगर नहीं देखा है तो इसका अर्थ ये हुआ कि इनके दादा के दादा हुए ही नहीं मतलब इनके दादा के पिता का कोई बाप ही नहीं ...आगे ये खुद सोचें ये क्या कह रहे हैं अपने बाप के बारे में ? हम नहीं लिख सकते !
    जब हिन्दुओं व उनके संगठनों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का कड़ा विरोध किया तो इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम ने रामसेतु को खुद ही तोड़ दिया था अब कोई इस सरकार से पूछे कि इन दोनों हल्फनामों को मिलाकर देखो सत्य अपने आप सामने आ जाएगा। किसी ने क्या खूब कहा है कि एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं !
    जो सरकार हिन्दुओं की भावनाओं की परवाह न करते हुए ऐसे हल्फनामे माननीय सर्वोच्चन्यायालय में दे सकती है उसे तो खुल कर डैनिस पत्रकार के उस कार्टून का समर्थन करना चाहिए था जिसमें हजरत मुहम्मद को जिहादी आतंकवाद का प्रेरणा सत्रोत बताते हुए बम्ब फोड़ते हुए दिखाया था पर उसका तो इस जिहाद समर्थक सरकार ने विरोध किया वो भी जिहादियों के साथ मिलकर ! वाह क्या धर्मनिर्पेक्षता है ?
    · श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित 800 कनाल भूमि का कश्मीर घाटी में जिहादियों द्वारा यह कह कर विरोध किया कि ये जमीन आवंटित होने से घाटी में फिर से हिन्दू वापिस आ जांयेगे जिन्हे 15 वर्ष जिहाद चलाकर मारा व निकाला गया । विरोध प्रदशर्नों के दौरान तीर्थ यात्रियों पर हमले किए गये, तिरंगा जलाया गया,पाकिस्तानी झंडा फैराया गया। सरकार ने जिहादी आतंकवादियों की इस देशद्रोही जंग को सफल बनाते हुए सिर्फ तीन दिन में ये भूमि आवंटन रद्द कर दिया।
    सरकार के इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी निर्णय के विरूद्ध भूमि आवंटन को रद्द न करने के लिए देशभक्त संगठनों, सारे देश के हिन्दुओं द्वारा जम्मू के देशभक्त भारतीयों के नेतृत्व में अंदोलन चलाया गया । जिसमें देशभक्त मुसलमान भी शामिल हुए । इस अंदोलन में भारत माता की जय, वंदेमातरम् के नारे लगाये गये, सारे अंदोलन को तिरंगे के सम्मान में चलाया गया । सरकार ने हर तरह का बल प्रयोग कर व षड्यन्त्र रच कर इस अंदोलन को कुचलने का प्रयत्न किया । शहीद कुलदीप जी जैसे अनेकों लोगों ने बलिदान दिया ।लेकिन सरकार के कानों तक देशभक्ति से ओतप्रोत अंदोलन की आवाज नहीं पहुंची। कुल मिलाकर इस अंदोलन के थमने के बजाए और ताकतवर होता देख सरकार ने 70 दिनों को बाद घुटने टेके।
    ये होता है मानसिकता का असर। क्योंकि ये सरकार हिन्दुविरोधी देशद्रोहियों की है इस लिए गद्दारों की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी बात मानने में 3 दिन लगे और राष्ट्रवादियों की बात 70 दिन तक सुनाई ही नहीं दी !
    · यह वही सरकार है जिसने भारत माता व हिन्दूदेवी देवताओं का अपमान करने वाले एम एफ हुसैन को सजा देने के बजाए उसे पुरस्कृत किया।
    · यह वही सरकार है जिसने सारे भारत में एक साथ एक ही दिन वन्देमातरम् गाये जाने का आदेश दिया । लेकिन अलगाववादी आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध करने पर उन गद्दारों को फाँसी पर लटकाने की बजाए अपना आदेश ही वापिस ले लिया और गद्दारों के विरोध को जायज ठहराने का अपराध किया ।
    · आज वही सरकार वन्देमातरम् का समर्थन व देशद्रोहियों का विरोध करने वाले सैनिकों, तपस्वियों, हिन्दुओं व हिन्दुओं के संगठनों के कार्यकर्ताओं को देशभक्ति के जुर्म में जेलों में बन्द कर उनके ऊपर अत्याचार कर रही है। ईसाई व मुस्लिम देशों से मिलने वाले पैसों के बदले हिन्दुओं व उनके संगठनों पर डंके की चोट पर कुत्तों की तरह भौंकने वाले टी वी चैनल इन क्राँतिकारियों के बारे में अपशब्दों का प्रयोग किसी भी कीमत पर चाँद की ओर मुँह कर थूकने जैसा प्रयास कर रहें हैं । इस बात से बेखबर कि थूक खुद इनके अपने मुँह पर गिर रहा है सब देशभक्त जनता समझती है कि ये गद्दार टी.वी चैनल किसके टुकड़ों पर पलते हैं ।
    · यह वही सरकार है जिसने आंध्रप्रदेश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करने के आरोप मे पकड़े गये मुसलमानों को छोड़ते वक्त एक-एक आटो भेंट किया।
    · यब वही सरकार है जिसने मध्यप्रदेश व अन्य प्रदेशों की सरकारों द्वारा सिमी उर्फ इंडियन मुज्जाहीदीन के आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए गये अभियान को रूकवाने के लिए ये कहकर दबाव डाला कि ये निर्दोष मुसलमान हैं। बाद में उसी सिमी ने बंगलौर से लेकर हैदराबाद तक सैंकड़ो विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं के घर उजाड़ कर अपने निर्दोष होने का प्रमाण केन्द्र सरकार को दे दिया !
    · यह उसी गिरोह की सरकार है जिसने 15 फरवरी 2008 को कोयम्बटूर बम्ब हमले में मारे गये 58 लोगों के कत्ल के दोषी अब्दुल मदनी को पहले जेल में हर तरह की सुविधायें दी और बाद में उसे छुड़वा दिया।
    आज उसी गिरोह की केन्द्र सरकार बिना किसी प्रमाण के निर्दोष हिन्दुओं को जेल में डाल कर टैस्ट पर टैस्ट करवाये जा रही है और हर तरह से फंसाने का प्रयत्न कर रही है।
    हिन्दुओं को सरकार के षड्यन्त्र का पता न लग जाए इसके लिए सूचनांयें लीक करवाकर हिन्दुविरोधी मीडिया का दुरूपयोग कर हिन्दुओं व साधु- सन्तो को बदनाम कर रही है ।
    · ये वही सरकार है जिसने माननीय सर्वोच्चन्यायालय द्वारा नियुक्त किए गए सेवानिवृत न्यायाधीश नानावती जी के द्वारा जारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक दागी सेवानिवृत न्यायाधीश यु सी बैनर्जी को जांच पर लगाया सिर्फ यह सिद्ध करने के लिए कि 2000 जिहादी मुसलमानों की जिस भीड़ ने ट्रेन में सफर कर रहे हिन्दुओं को जलाने के लिए गोधरा में ट्रेन रोककर आग लगाई वो भीड़ निर्दोष है और जो हिन्दू ट्रेन में सफर कर रहे थे और इस आग में जलकर राख हो गये वो दोषी। क्या आपने कभी ऐसी कमीनी नीच हिन्दुविरोधी किसी और सरकार के बारे में सुना है ?
    · यह वही सरकार है जो आरक्षण के बहाने हिन्दुओं को लड़वाने का प्रयत्न करती है। जिसे माननीय सर्वोच्चन्यायालय रोकने का प्रयत्न करता है। लेकिन ये सरकार अपनी फूट डालो और राज करो की नीति को वोटों में बदलने के लिए कानून बनाती है कि प्रतिवर्ष 4,50,000 रूपये यानि कि हर महीने 37000 रू कमाने वाला व्यक्ति पिछड़ा हुआ है ।
    अब आप सोचो जिसकी एक वर्ष की पूरी कमाई ही 37000 रूपये या इससे कम हो उसे क्या कहेंगे ?
    जिन लोगों की वार्षिक आय 4,50,000 रूपये से कम है उनसे सरकार टैक्स क्यों लेती है ?
    जिन लोगों को ये भ्रम है कि आरक्षण गरीबों की सहायता करने की व्यवस्था है उनकी आंखें अब खुल जानी चाहिए। हम तो सब हिन्दुओं से यही कहेंगे कि इन विषयों पर आपस में न लड़ें क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह की यही मनसा है कि हिन्दुओं को किसी भी तरह आपस मे लड़वाया जाए ।
    गरीब कोई भी है उसकी आपस में मिलकर सहायता करें ताकि हम सब हिन्दू इस देशद्रोही गिरोह के विघटनकारी षड्यन्त्रों को असफल कर सकें।
    · यह वही सरकार है जो झूठे आरोपों में फंसाये गये हिन्दुओं के विरूद्ध कोई प्रमाण न मिलने पर उनके विरूद्ध मकोका लगाती है अन्य प्रदेश सरकारों द्वारा बनाए गये ऐसे ही कानूनों से जिहादियों को बचाने के लिए उन कानूनों को मंजूरी नहीं देती है ।
    गुजकोका को तो ये जिहाद समर्थक सेकुलर सरकार गुजरात सरकार द्वारा बार-बार आग्रह करने पर भी रोके रखती है । अब आप ही सोचो कि क्यों न कहें कि इस हिन्दुविरोधी सरकार का मकसद जिहादियों की रक्षा कर देश को बार-बार लहूलुहान करवाना है।
    इस चार वर्ष के कार्यकाल में इस देशद्रोही सरकार ने वो कर दिखाया है जिसका सार ही इस सरकार व इसका समर्थन करने वाले गिरोह को माननीय सर्वोच्चन्यायालय में देशद्रोही, सांप्रदायिक, हिन्दुविरोधी व गद्दार साबित करने के लिए काफी है इसके सारे कुकर्म देखने पर तो इस गिरोह को संबोधित करने के लिए मानवता का शत्रु दानव या शैतान जैसे शब्द भी छोटे पड़ते हैं।
    आप ही बताओः-
    · जो सरकार हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटे जैसे कि संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,छात्रवृतियां मुसलमानों के लिए, विकास मुस्लिमबहुल जिलों का,यहां तक कि बजट को भी ... उसे सांप्रदायिक नहीं तो क्या कहेंगे ?
    · जो सरकार संविधान व माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों का पालन न करे जैसे कि अफजल को फाँसी व धर्म आधारित आरक्षण... वो देशद्रोही नहीं तो और क्या है?
    जो सरकार मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान राम के अस्तित्व को नकारे उनकी निशानियों को मिटाने का प्रयत्न करे साधु सन्तों का अपमान करे हिन्दुओं को बदनाम करे... वो हिन्दुविरोधी नहीं तो और क्या है ?
    अन्त में जो सरकार एक विदेशी एंटोनियो माइनो मारियो की गुलाम होकर भारतीय सेना में धर्म के आधार पर फूट डालने का प्रयास करे, देशभक्त सैनिकों को गिरफ्तार करे,शहीदों का अपमान करे,जिहादियों के विरूद्ध काम करने वाले साधु-सन्तों सैनिकों साध्वियों व हिन्दुओं को आतंकवादी कहे व जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई वो सरकार गद्दारों की नहीं तो किसकी है ?
    आशा है आपको ये बात स्पष्ट हो गई होगी कि इस गिरोह को समस्त देशभक्त व धर्मपरायण लोग हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह क्यों कह रहे हैं व इस सरकार को सेना से डर क्यों लगा ?
    हमने इस सैकुलर बोले तो शैतानी गिरोह को आज से 20 वर्ष पहले(18 वर्ष की आयु में) जब भारतीय राजनीति में देखा तो हमने भी बाकी लोगों की तरह यही माना कि ये लोग राजनीति कर रहे हैं सत्ता में आने पर कोई देशद्रोही या हिन्दुविरोधी काम नहीं करेंगे ।
    फिर कुछ वर्ष बाद युनाइटेड फ्रंट सरकार के कामों को देखकर ये भ्रम टूटा और लगा कि ये गिरोह तो अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में देशद्रोह के मार्ग पर अग्रसर है पर हमनें सोचा कि हो सकता है हम तत्कालिक कारणों व जवानी के जोश से प्रभावित होकर ऐसा महसूस कर रहे हैं।
    लेकिन आज नवम्बर 2008 में इनके विपक्ष में रहते किए गये मिथ्या प्रचार को छोड़ भी दें तो भी सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के षड्यन्त्रों व कुकर्मों को देखकर कोई भी जागरूक व्यक्ति इसी निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि यह राजनीति नहीं -गद्दारी है, धर्मनिर्पेक्षता नहीं- देशद्रोह है।, अल्पसंख्यकवाद नहीं हिन्दूविरोध- बोले तो- मानवता का विरोध है।।
    ये गिरोह हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गद्दारों का गिरोह है ।
    · । क्योंकि सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण भी सांप्रदायिक आधार पर देश के विभाजन का प्रमुख कारण था। लेकिन इस देशद्रोही सरकार ने संविधान का उल्लंघन कर मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण दिया। जिसे माननीय न्यायालय ने रोकने का हर संभव प्रयास किया पर सब बेकार क्योंकि ये सरकार हिन्दूराष्ट्र भारत की हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटकर देश को तबाह करने की कसम जो उठा चुकी है ।
    ये सरकार सच्चर कमेटी के आधार पर कुतर्क देती है कि मुसलमानों को नौकरियां कम हैं हिन्दू जानना चाहते हैं कि भारत पाक बांगलादेश सब अखण्ड भारत के हिस्से हैं जिस पर सबका अधिकार था जब पाक व बांगलादेश में हिन्दुओं का अधिकार नहीं फिर भारत में मुसलमानों को विशेषाधिकार देने का तर्क क्यों ?
    वैसे भी इस वक्त इन सब देशों में कुल नौकरियों का जो हिस्सा मुसलमानों के पास है वो कम नहीं बहुत ज्यादा है बाकी गिनती तो आप करो जो आँकड़े हमारे पास उपलब्ध हैं वो हिन्दुओं के लिए खतरे की घंटी है इस वक्त अखण्ड भारत की तीन क्रिकेट टीमें हैं जिनमें 33 खिलाड़ी खेलते हैं उनमें से 22- 25 मुसलमान हैं यानिके 75% से ज्यादा जबकि 8-11 हिन्दू सिख ईसाई जैन बौध पारसी यानिके 27% से कम। और मुसलमानों की कुल आबादी हिन्दुओं की आबादी से आधी ।
    ये भी मुसलमानों को आरक्षण देकर छीनने पर तुले हो बेशर्मों ,कुछ तो शर्म करो ,अगर तुम्हें मुसलमानों की इतनी ही चिन्ता सत्ता रही है तो इन सब को साथ लेकर पाकिस्तान या बांगलादेश क्यों नहीं चले जाते ।
     
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  4. Bad Wolf

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    मुम्बई हमला खतरे की घंटी
    हम अपने प्यारे हिन्दूराष्ट्र भारत को अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे देशद्रोह हिन्दूविरोध को उन्हीं का मार्ग अपनाकर गद्दारों का इस पुण्य भूमि भारत से सफाया कर देने का प्रण लेकर इस अभिव्यक्ति के क्रम को विराम दे चुके थे कि 26/11/2008 को मुम्बई में जो हुआ उसने इस पुस्तक में अभिव्यक्त की गई युद्ध की शंका के साक्षात दर्शन करवा दिए ।
    अब इस बर्बर इस्लामिक हमले के बारे में न लिखा जाए ऐसा कैसे हो सकता है ।
    26 नवम्बर शाम को हमने बी. बी. सी. पर एक चर्चा सुनी जिसका शीर्षक था साँप्रदायिक आतंकवाद परन्तु इस सारी चर्चा का मकसद था हिन्दुओं को बदनाम करना व भारत में जिहादी आतंकवाद को विभिन्न कारण देकर न्यायोचित ठहराना । पहले तो हमने इस चर्चा के बारे में न लिखने का निर्णय लिया था लेकिन मुम्बई में हुए हमले ने हमें इन कातिलों के ठेकेदारों से बात करने पर मजबूर कर दिया ।इस कार्यक्रम में के एस ढिल्लों सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी जो पुलिस सुधारों पर काम कर रहे हैं ऐसा बताया गया । ये ढिल्लों कहते हैं कि भारत में कोई मुस्लिम आतंकवाद नहीं है सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या है और ये समस्या इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि भारत में मुसलमानों को दबाने की कोशिश हो रही है।
    ढिल्लों जी आप पुलिस सुधारों पर काम कर रहें हैं या जिहादी आतंकवादियो को बचाने के सूत्रों पर । इस सब के लिए पैसे सीधे साउदी अरब से मिलते हैं या बाया पाकिस्तान होकर । याद रखो आज यदि ये समाज पुलिस पर संदेह करता है तो आप जैसे आतंकवादियों के चाकर उँचे पदों पर बैठे या रहे पुलिस अधिकारियों की वजह से । आप जैसे गद्दारों की वजह से ही स्वर्गीय मोहन चन्द शर्मा जैसे देशभक्त जवानों का बलिदान देने के बावजूद ये जिहादी दानव आपे से बाहर होता जा रहा है ।
    इस कार्यक्रम में भारतीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जगदीश वर्मा कहते हैं कि इन जिहादी आतंकवादियों को रोकने के लिए न तो सख्त कानून बनाने चाहिए न ही इनको गोली मारी जानी चाहिए जिहादी जो कहते हैं उस पर सरकार को अमल कर इनकी समस्या का समाधान करना चाहिए ।
    जगदीश जी इनकी समस्या का समाधान है भारत के सब हिन्दुओं का कत्ल कर यहां दारूल इस्लाम बनाना सिर्फ भारत ही नहीं सारी दुनिया को इस्लामी राज्य बनाना । जगदीश जी आपकी इसी सोच की वजह से आप दानवाधिकार आयोग बोले तो आतंकवादी अधिकार आयोग के संस्थापक सदस्य कहलाने के पात्र हैं आपका ही वो कार्यकाल था जिसने भारतीय मानवाधिकार आयोग को हिन्दुविरोधी आतंकवादी आयोग बना डाला और हिन्दुओं को अपने ही देश में मूलाधिकारों से वंचित होने का एहसास करवाया ।
    हमें अफसोस होता है आपको ये बताते हुए कि मानवाधिकार कानून का पालन करने वाले शान्तिप्रिय नागरिकों के लिए होते हैं न कि हर तरह के कानून और मानबता के बन्धन तोड़ कर निर्दोश नागरिकों का खून बहाने के लिए प्रतिबद्ध आतंकवादियों के लिए ।
    जिस भारत के इतने बड़े पद पर आप जैसे अमन चैन के शत्रु व आतंकवादियों के मित्र पहुँच जाँयें उस भारत को इन जिहादी राक्षसों के हमलों से कौन बचा सकता है। आपको ये समझना चाहिए कि हर रोज हो रहे आतंकवादी हमलों में मारे जाने वाले निर्दोष नागरिकों के कत्ल के लिए इन आतंकवादियों से ज्यादा आप जैसे इन आतंकवादियों के समर्थक जिम्मेदार हैं ।
    हम तो कहते हैं कि अफजल जैसे जिहादियों को फाँसी पर चढ़ाने से पहले आप जैसे उचें पदों पर बैठे या रहे आतंकवादियों के पैराकारों को पहले फाँसी पर चढ़ाना चाहिए ताकि आम भारतीय अमन चैन से जिन्दगी जी सकें ।
    कुलदीप नैयर जी कहते हैं भारत की सारी पुलिस खराब है और हिन्दुओं में तालिबान हैं।
    ये कुलदीप नैयर जी वही हैं जो आज तक गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन में आग लगाकर जिन्दा जलाए गये हिन्दुओं की प्रतिक्रियास्वरूप मारे गये लगभग 700 मुसलमानों का विरोध करने के लिए दर्जनों लेख लिख चुके हैं लेकिन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों द्वारा मारे गये 60000 से अधिक हिन्दुओं व विस्थापित हुए लाखों हिन्दुओं के बारे में लिखते वक्त इनकी स्याही सूख जाती है ।
    यह वही लेखक है जो बिल्कुल ऐसा ही हमला संसद भवन पर करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को छुड़ाने के लिए मोमबती जलाओ अभियान चलाता है व सरकार पर दबाव बनाकर उस जिहादी को छुड़ाने में सफल होता है और अपने तालिबानी साथियों को खुश करता है।
    हम इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी परजीवी को ये बताना चाहते हैं कि तालिबान हिन्दुओं में नहीं उन बिके हुए लेखकों में हैं जो संसद भवन पर हुए जिहादी हमले को झूठा बताकर जिहादियों का समर्थन कर लोकतन्त्र व देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के बलिदान का अपमान कर अपने देशद्रोही होने का प्रमाण देते हैं।
    ये तो इन देशविरोधियों की किस्मत अच्छी है कि आज देश में एक विदेशी की गुलाम सरकार है और देशभक्तों ने अभी शस्त्र नहीं उठाये हैं वरना आज तक ऐसे गद्दार लेखकों को या तो सरकार फांसी चढ़ा देती या कोई स्वाभिमानी हिन्दू गोली मार देता।
    हम इन हिन्दुविरोधी लेखकों को बताना चाहते हैं कि समझदार लोग जिस पतल में खाते हैं उसी पतल में छेद नहीं करते चाहे शत्रु कितना भी पैसा क्यों न दे दे । याद करो उन लेखकों को जिन्होंने इन राक्षसों से देश धर्म को बचाने के लिए हर तरह के जुल्म सहने के बावजूद देशभक्ति से ओतप्रोत लेख लिखे ओर फिर देखो उन गद्दारों को जो चन्द टुकड़ों की खातिर तालिबानों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं !
    मुम्बई में हुए इस हमले में अपने 20 जवान शहीद हुए जिनमें दो अजय कमांडो भी शामिल थे व कुछ बहादुर जवान घायल भी हुए । आओ मिलकर इन सब शहीदों को प्रणाम करते हुए प्रण लें व घायलों के शीघ्र स्वीस्थय लाभ के लिए पूजा करें।
    “तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें ’
    इसके अतिरिक्त 160 भारतीय व 25 विदेशी मारे गये व 300 से अधिक घायल हुए । यह हमला ऐसे समय में किया गया जब भारत की हिन्दुविरोधी सरकार ने पुलिस को जिहादी आतंकवादियों से देश का ध्यान हटाने की खातिर निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध करने में लगाया हुआ था । सरकार की इस देशविरोधी नीति की कीमत देश के बहादुर जवानों को शहीद होकर चुकानी पड़ी व शांतिप्रिय लोगों को अपनी जान गंवाकर और भारत को अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर ।
    पुलिस को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाना कितना जरूरी है इस बात का भी एहसास इस वक्त करना अत्यन्त आवश्यक है। पर एहसास वो कर सकते हैं जिनको देश की चिन्ता हो,देश से प्यार हो !
    अब आप ही फैसला करो कि इन हमलों में हुए जान-माल के नुकसान के लिए पाँच वर्षों से जिहादियों के अनुकूल वातावरण बना रही इस देशद्रोही सरकार, गद्दार सेकुलर गिरोह व जिहाद समर्थक मीडिया को जिम्मेवार क्यों न माना जाए ?
    इस हमले का सीधा प्रसारण अधिकतर समाचार चैनलों ने दिखाया जिसने हमारे जवानों के काम को मुशकिल बनाया व आतंकवादियों की सहायता की । क्योंकि ऐसा सम्भव है कि देश-विदेश में बैठे जिहादियों के आका इन चैनलों को देखकर जिहादियों की सहायता कर रहें हों ।
    हालांकि कुछ चैनलों ने बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर इस प्रसारण को सीधा दिखाने के बजाए कुछ देर बाद दिखाना शुरू किया । आपने देखा होगा कि कुछ देशद्रोही चैनलों ने किस तरह आतंकवादियों का गुणगान किया व उन्हें हीरो बनाकर प्रचारित करने का दुस्साहस किया ।
    एक चैनल जो अलकायदा के सहयोगी चैनल अलजजीरा का सहयोगी है जो लगातार हिन्दूविरोध के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। ये हिन्दूविरोध की ये प्रक्रिया इस चैनल के अलजजीरा के साथ समझौता करने के बाद से ही दिख रही है पहले ये चैनल बाकी सब चैनलों से अच्छा होता था ।
    इस चैनल ने तो खुद को मुस्लिम जिहादियों का चैनल होने का दावा ही कर डाला जो यह सिद्ध करता है कि अधिकतर चैनलों में अपने आप को ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम जिहाद समर्थक सिद्ध करने की प्रतिस्पर्धा हो रही है ।
    इस चैनल ने तो तब हद ही कर दी जब इसने अपने सूत्रों का प्रयोग करते हुए एक मुस्लिम जिहादी आतंकवादी का इंटरव्यु ही ले डाला । हालांकि ये इन्टरव्यु करना सही नहीं था पर जब कर ही दिया तो ये इन्टरव्यु सब देशभक्त हिन्दुओं की आँखे खोलने वाला निकला ।
    आतंकवादी ने स्पष्ट कहा कि भारत में भगवा सरकार है हिन्दुओं की सरकार है यह वही आरोप है जो ये सेकुसर गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों,शिवसेना व भाजपा पर लगाते हैं ।
    हमें अचम्भा हुआ कि जो सरकार पूरी तरह से देशद्रोह व हिन्दूविरोध के मार्ग पर चलते हुए मुस्लिम जिहादियों को खुश करने के लिए मुस्लिम जिहादी आतंकवादी को फाँसी नहीं देती है, देश के लिए शहीद हुए जवानों का अपमान करती है, आतंकवादियों को खुश करने के लिए पोटा को हटाकर कोई नया जिहाद विरोधी सख्त कानून नहीं बनाती है, हिन्दुओं के बच्चों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करती है , साधु-सन्तों को अपमानित करती है, हिन्दूविरोध में मर्यादा और बेशर्मी की हर हद पार करते हुए मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारती है। उस सरकार को भी मुस्लिम जिहादी ने मुसलमान विरोधी, हिन्दुओं की सरकार बताया ।
    उस जिहादी ने इस सरकार से मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को आजाद करने के लिए कहा क्योंकि ये मुसलमान किसी हिन्दू की गुलामी सहन नहीं कर सकते । हिन्दुस्थान के मुसलमानों को हिन्दुओं की गुलामी से आजाद न करने पर हिन्दुओं पर जिहादी हमले और तेज करने की चेतावनी दी । इस मुस्लिम जिहादी ने इस जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि अयोध्या में राममन्दिर नहीं बनना चाहिए ।
    साथ ही ये भी कह दिया कि जब भी मुसलमान हिन्दुओं को गोधरा की तरह जिन्दा जलां दें या बम्ब हमलों में मार दें तो हिन्दुओं को निहत्था बिना लड़े मरना चाहिए गुजरात की तरह इस हमले का जबाब देकर जिहादियों के समर्थकों को नहीं मारना चाहिए । यही मांग ये जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह करता रहता है ।
    अन्त में इस जिहादी की सारी बातों का सार यही था कि ये मुस्लिम जिहाद तब तक जारी रहेगा जब तक भारत के सब मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को मुस्लिम देश नहीं बना दिया जाता(वन्देमातरम् का विरोध इसी कड़ी का एक हिस्सा है) मतलब साफ है कि जब तक कश्मीर घाटी की तरह सब हिन्दुओं को हलाल नहीं कर दिया जाता या फिर वो भाग नहीं जाते !
    कुल मिलाकार इस मुस्लिम जिहादी आतंकवादी ने वो ही बातें कहीं जो भारत के मुस्लिम जिहादी और उनका समर्थक ये सैकुलर गिरोह कहता है अब आप ही फैसला करो कि ये गिरोह किसका है देशविरोधी आतंकवादियों का या देशभक्त भारतीयों का ?
    अगर आप सोच रहे हैं कि ये आवाज भारतीय मुसलमानों की नहीं तो जरा ये पढ़ो ।
    मुहम्मद अजहरूद्दीन मुसलमान होने के बावजूद देश की क्रिकेट टीम में चुना जाता है देश की टीम का कप्तान बनाया जाता है क्या कोई हिन्दू उसके मुस्लिम होने के कारण उसके चुने जाने या कप्तान बनने का विरोध करता है नहीं न ।
    पर जब यही अजहरूद्दीन टीम के हित बेचता हुआ पकड़ा जाता है तो ये क्या कहता है क्योंकि मैं मुसलमान हूँ इसलिए मुझे फंसाया जा रहा है ।
    जावेद अखतर और उसकी घर वाली गाने/फिल्में बनाकर देश के हिन्दुओं से करोड़ों रूपये कमाते हैं कोई हिन्दू उनके गानों/फिल्मों का उनके मुसलमान होने की वजह से विरोध नहीं करता लेकिन शबाना आजमी कहती है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है क्योंकि किसी सोसाइटी में विशेषाधिकार देकर उसे मकान नहीं दिया गया । जाबेद अखतर तो अक्सर उन देशभक्त हिन्दू संगठनों के बिरूध जहर उगलता रहता हैं जो मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का विरोध करते हैं ।
    देश के विभाजन के वक्त मुसलमानों द्वारा देश के साथ की गई गद्दारी से शर्मसार होकर अपना नाम बदलने वाले दिलीप कुमार उर्फ युसुफ खाँ की असलिएत तब सामने आती है जब वो सेकुलर गिरोह को फायदा पहुंचाने के लिए हिन्दुओं पर मुस्लिम जिहादियों द्वारा ढाये जा रहे जुल्मों का विरोध करने वाले हिन्दुओं व उनके संगठनों को अपशब्द कहता है ।
    नदीम – श्रबण हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल जोड़ी परिणाम गुलशन कुमार का कत्ल नदीम द्वारा । पकड़े जाने के डर से नदीम इंगलैंड भाग जाता है । वहां कोर्ट में कहता है कि भारत हिन्दू देश है अतः उसे मुस्लिम होने के कारण भारत में न्याय नहीं मिल सकता ।
    भारत में रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनें आमने सामने टकराती हैं बहुत से लोग मारे जाते हैं शुरू में सब सोचते हैं कि ये ट्रेनें दुर्घटनावश टकरा गईं । बाद में पता चलता है कि ये ट्रेनें एक मुसलमान द्वारा जानबूझ कर हिन्दुओं को मारने के लिए टकराइ गई हैं जो वहां नौकरी करता था जब पुलिस उसे पकड़ने की कोशिश करती है तो जानकारी मिलती है कि उसने पहले से भागने की तैयारी कर रखी थी और वो परिवार सहित पाकिस्तान पहुँच गया है ।
    उमर अबदुला जिसे मुसलमानों की नई पीड़ी का प्रतिनिधि माना जा सकता है संसद में कहता है बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए एक इंच भूमि भी नहीं दी जायगी।
    पिछले 3-4 बर्षों में सिर्फ मुसलमानों से जुड़े मसलों पर करबाई गई चर्चा-परिचर्चा में भाग लेने वाले मुसलमानों ने हर स्तर पर हिन्दू जनता व देश को धमकाने की कोशिश की । यहां तक कहा गया कि अगर मुसलमानों की हर बात नहीं मान ली जाती तो देश में मुस्लिम जिहादी हमले होते रहेंगे ।इन चर्चाओं में मुस्लिम कलाकारों से लेकर सांसदों तक का अलगावबादी रूख सबके सामने आ गया व ये भी सपष्ट हो गया कि पाकिस्तान की तरह ये मुसलिम प्रतिनिधि भी आतंकवाद को हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं । हैरानी तो तब हुई जब चर्चा करवाने वाले चैनलों के पत्रकारों ने इनके अलगाववादी व धमकी भरे देशविरोधी रुख को निरूत्साहित करने या टोकने के बजाय इनके अलगाववादी रूख का समर्थन किया।
    अब आप ही बताओ ये गद्दारी नहीं तो और क्या है इनमें से किसी को भी हम कभी मुस्लिम जिहादी आतमकवादी नहीं मानते थे पर काम तो इन सब ने अलगाववाद का ही किया ।
    इन सब मुसलमानों ने वो ही तर्क दिया जो मुस्लिम जिहादी आतंकवादी और उनके समर्थक अक्सर हिन्दुओं को मारने वाले मुस्लिम जिहादियों को बचाने के लिए देते हैं ऐसे तर्क देने में फारूकी और जावेद अख्तर जैसे लोग सबसे आगे रहते हैं ! फारूकी जैसे मुसलमानों की असलिएत उस वक्त भी सामने आ गई थी जब इन लोगों ने वन्देमातरम् का विरोध किया था ।
    भारत का इतिहास ऐसी धोखेबाजी से भरा पड़ा है । क्रिकेट मैच में भारत की जीत पर मातम और पाकिस्तान की जीत पर जशन मनाते हुए इन मुसलमानों में छिपे जिहादियों को लाखों भारतीयों ने अपनी आँखों से देखा है ।
    अब आप ही बताओ इनमें से भरोसा किया जाए तो किस पर और क्यों ?
    क्या गारंटी है कि कश्मीर की तरह हिन्दुओं को खत्म करने की स्थिति में आ जाने के बाद ये मुस्लिम जिहादी एक भी हिन्दू को जिन्दा छोड़ देंगे ?
    हम तो आतंकवाद समर्थक इस सेकुलर गिरोह से यही कहेंगे कि मुस्लिम जिहाद की फितरत को समझो इसके इतिहास को पढ़ो और देशद्रोह के इस आत्मघाती मार्ग को छोड़कर अपनी व अपने देशवासियों की जान बचाने के रास्ते तलाशो वर्ना कश्मीर घाटी की तरह इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मिटा दिये जाओगे । ये वक्त युद्ध का वक्त है आपस में लड़ने के बजाए एकजुट होकर इस मुस्लिम जिहाद को बेनकाब कर इस की जड़ को भारत से हमेशा के लिए खत्म कर दो ।
    मुम्बई हमले के दौरान इस जिहादी ने जो कुछ भी कहा वो मुस्लिम जिहादियों की हर योजना को बेनकाब करता है जिसके अनुसार इस जिहाद का एकमात्र मकसद हिन्दुओं को तबाह और बर्बाद कर भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना है । इस जिहादी ने जो कुछ कहा वो नया नहीं है यही बात दबी जवान में हमारे अपने देश में मुसलमानों में छिपे जिहादी और उनके समर्थक कई वर्षों से कह रहे हैं सिर्फ कह ही नहीं रहे हैं कश्मीर में अपनी योजनानुसार हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा चुके हैं व भारत के बाकी हिस्सों से मिटाने से लिए लगातार बम्ब विस्फोट कर रहे हैं।
    हम तो भारतीय सेना से ये विनती करेंगे कि जिस तरह देश के गृहमन्त्री ने कमाँडो के आने की जानकारी इन चैनलों को दी व जिन चैनलों ने संदिग्ध भूमिका निभाई उसकी गहन जाँच होनी चाहिए साथ ही सेना को इन चैनलों द्वारा देशविरोधी तत्वों को फायदा पहुँचाने की खातिर हिन्दुओं, सुरक्षाबलों व सैनिकों की छवि को पिछले कुछ वर्षों से समय-समय पर किए जा रहे दुष्प्रचार की यथाशीघ्र जाँच करवाकर इन्हें उचित दण्ड दिया जाना चाहिए । ये दुष्प्रचार कई देशविरोधी हिन्दुविरोधी चैनलों पर इतने बड़े हमलों के बाद भी जारी है ।
    हम तो उस वक्त दंग रह गए जब एक हिन्दुविरोधी चैनल(एन डी टी वी) के कार्यालय में बैठे विनोद दुआ को अपने रिपोर्टर द्वारा यह बताये जाने पर कि सैनिकों की जीत की खुशी में लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाय तो ये विनोद दुआ भड़क उठे और इस दुष्ट ने भारत माता की जय का विरोध किया।
    यह वही चैनल है जो ईरान की इस्लामिक क्राँति का तो समर्थन करता है पर भारत में हिन्दूक्रांती का डटकर विरोध करता है ।
    भारत में न्यायालय द्वारा 1993 के मुम्वई बम हमलों के दोशियों को सजा सुनाय जाने के बाद मुसलमानों को देश के विरुद्ध भड़काने की कोशिश करता है ।
    कुल मिलाकर ये चैनल हर वक्त भारतीयों को सांप्रदाय और जाति के आधार पर लड़ाने का प्रयत्न करता हुआ नजर आता है। सुरक्षावलों व हिन्दुओं से जुड़े संवेदनशील मामलों को उछालकर उनकी छवी खराव करना इस चैनल की आदत वन गई है इस चैनल के कार्यक्रमों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस चैनल को कोई हिन्दुविरोधी-देशविरोधी विदेशी ताकत चला रही है या फिर ये देशविरोधियों के पैसे से चलता है।
    वैसे भी ये चैनल देश में देशद्रोही चैनल के रूप मे मशहूर हो चुका है देखो इसका आगे चलकर क्या हश्र होता है इसे देशभक्त हिन्दू जनता ठीक करती है या आने वाली देशभक्त सरकार या फिर भारतीय सेना ?
    हम तो आने वाली किसी भी देशभक्त सरकार से इस दुआ जैसे पत्रकारों सहित माजिद मैनन,महेश भट व नबलखा जैसे जिहादियों के समर्थकों का नार्को टैस्ट करवाकर ये किसके बल पर देशविरोधी काम करते हैं, पता लगाया जाए व ऐसे सभी देशविरोधियों को सबक सिखाया जाए ।
    हमें तो हैरानी होती है ये देखकर कि भारत के अधिकतर समाचार चैनल व अन्य संचार के साधन देशद्रोह व गद्दारी के रास्ते पर इस हद तक क्यों बढ़ गए कि उनकी गद्दारी हमारे जैसे मीडिया के कट्टर समर्थकों को भी खटकने लगी है । हम देश के जितने भी लोगों से मिले उन में अधिकतर का यही कहना था कि इस मीडिया पर अगर यथाशीघ्र प्रतिबंध न लगाया गया तो ये गली-गली में देशद्रोही और गद्दार पैदा कर देगा ।
    हमें यहां यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं कि देशभक्त मीडिया किसी भी देश व समाज के लिय प्रेरणा स्रोत होता है पर विका हुआ गद्दार देशविरोधी मीडिया तवाही और बरबादी का कारण बनता है।
    हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि दूसरे देशों के चैनल इतने देशभक्त और हमारे यहां गद्दारों का इतना बड़ा टोला जो हर बक्त भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर हमला बोले रहता है । हमने 15 वर्ष की आयु में बी.बी.सी सुनना शुरू किया था । हमने लगातार उनके कार्यक्रमों में ईसाईयत व देशभक्ति के प्रति विशेष लगाव पाया । हिन्दू संगठनों के बारे में हर तरह का झूठा प्रचार करना बी.बी.सी कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान थी । हमें बुरा नहीं लगता था क्योंकि वो विदेशी थे उनका काम है हम पर हमला करना व अपना गुणगान करना ।
    तब हम सोचते थे कि जब हमारा अपना स्वतन्त्र मीडिया होगा तो वो इस हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी दुष्प्रचार का जबाब देगा । लेकिन हमारे होश तब उड़ गये जब भारत में स्वतन्त्र मीडिया की जगह विदेशियों का गुलाम विश्वासघाती मीडिया सामने आया जो उस बी.बी.सी से कहीं अधिक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ सपष्ट दिखाई दे रहा है ।
    राजस्थान में एक अनपढ़ हिन्दू महिला के मन्त्री बनने पर ये हिन्दुविरोधी मीडिया हाय तौबा मचाता है पर एक अनपढ़ विदेशी एंटोनिया माइनो मारियो द्वारा सारी सरकार को गुलाम बना लिये जाने पर इस मीडिया को कोई आपति नहीं होती । माना के राजस्थान की महिला अनपढ़ है पर भारतीय तो है देशभक्त तो है अपनी सभ्यता संस्कृति को तो समझती है सलाह भी लेगी तो किसी भारतीय से इस अंग्रेज की तरह तो नहीं है जिसने चुन-चुन कर हिन्दुओं को कांग्रेस के कोर ग्रुप से दूर कर दिया, जो खुद न भारतीय है न भारतीय संस्कृति और सभ्यता को समझती है सलाह भी लेती है तो अपनी विदेशी अंग्रेज मां से या फिर किसी ईसाई से ।
    हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि ईराक का एक देशभक्त मुस्लिम पत्रकार अपने देश को गुलामी की ओर धकेलने वाले ईसाई जार्ज बुश पर अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए जूता फैंक देता है और हमारे पत्रकार हमारे देश को गुलाम बनाकर बैठी विदेशी इटालियन ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो की हर बक्त चापलूसी करने की होड़ में ज्यादा से ज्यादा हिन्दुविरोधी-देशविरोधी दिखने का प्रयास करते हैं ।
    हमें ये देखकर और भी आशचर्य होता है कि भारत के देशभक्त हिन्दूसंगठनों द्वारा इस विदेशी ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो का विरोध करने पर देशभक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करने वाला ये हिन्दूबिरोधी-देशविरोधी मीडिया इस देशभक्त मुस्लिम पत्रकार का समर्थन करता है ।
    यह धन का भूखा मीडिया भरतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अंग्रेज प्रभुत्व वाली आई.सी.सी द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर तो आवाज उठाता है पर देश-विदेश में मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का समर्थन करता नजर आता है वजह साफ है बी.सी.सी.आई मालदार है क्रिकेट के मामले में बी.सी.सी.आई से इस मीडिया को बड़ी रकम प्राप्त होती है इसलिय मीडिया इन खिलाड़ियों का पक्ष लेता है।
    परन्तु दुनिया में और कोई हिन्दु देश न होने व भारत में हिन्दुओं के आर्थिक साधनों पर हिन्दुओं का अपना कब्जा न होने के कारण हिन्दुओं के अधिकारों या हिन्दुओं पर हो रही ज्यादतियों की बात करने पर हिन्दुओं से कोई पैसा प्राप्त होने की उम्मीद नहीं होती ।जबकि मुस्लिम और ईसाई देश इस्लाम और ईसाईयत के प्रचार प्रसार पर बड़ी रकम इन हिन्दुविरोधी-देशविरोधी चैनलों को देते हैं इसलिए ये देशविरोधी चैनल हर वक्त हिन्दु-धर्म पर हमला बोले रहते हैं, साधु-सन्तों को बदनाम करते हैं,राष्ट्रवाद की जगह अलगाववाद का पक्ष लेते हैं।
    मुम्बई पर हमले का एक सबसे भयानक पहलु यह रहा कि हथियारों का इतना बढ़ा भण्डार इतने संवेदनशील भवनों में व इतने सुरक्षित क्षेत्र में इतने दिनों से इक्ट्ठा किया जाता रहा और इसकी उस सरकार को भनक तक न लगी जो निर्दोष सैनिकों साधु-सन्तों हिन्दुओं को जेल में डालकर सन 2025 में होने वाले तख्तापल्ट का पर्दाफाश 17 वर्ष पहले करने का दावा कर रही थी व उन चैनलों के होते हुए जो इस सरकार के हिन्दुओं को बदनाम करने के षड्यन्त्र में कंधे से कंधा मिलाकर इस सम्भावित तख्तापल्ट के प्रमाण जुटाने के दावे कर रोज नई-नई कहानी चला रहे थे ।
    स्थिति इसलिए और भी गंभीर हो जाती है कि अगर मीडिया द्वारा चलाये जा रहे समाचार पर भरोसा करें तो शहीद हेमंत करकरे सहित ए टी एस के तीनों अधिकरी एक ही गाड़ी में सवार थे और तीनों गाड़ी के अन्दर बिना लड़े हुए मारे गये क्योंकि मुस्लिम जिहादियों ने गाड़ी पर इतना ताबड़तोड़ हमला किया कि इन्हें जवाबी कार्यवाही का मौका ही नहीं मिला और फिर उसी गाड़ी में सवार होकर मुस्लिम आतंकवादियों ने दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को मारा ।
    हम मीडिया द्वारा चलाए जा रहे इस समाचार को हरगिज न लिखते यदि इनके साथ घायल जवान को इस समाचार की पुष्टी करते हुए न दिखाया जाता । अगर ये समाचार गलत है तो दोषी चैनल को सजा दी जाए पर अगर सही है तो ये सरकार की जिहादी आतंकवादियों के प्रति लापरवाह सोच को दिखाता है।
    मानो सरकार निहत्थे हिन्दुओं को आतंकवादी कहकर प्रचारित करने के बाद ये मानने लग पड़ी हो कि आतंकवादी निहत्थे होते हैं और इन हिन्दुओं की तरह बिना किसी प्रतिरोध के पकड़ में आ जाते हैं या फिर सरकार ये मानने लग पड़ी थी कि ए टी एस के कुछ अधिकारीयों ने उन हिन्दुओं पर बर्बर जुल्म ढाये हैं जो जिहादियों को मारने की कोशिश कर रहे थे इसलिए जिहादी ए टी एस पर हमला नहीं करेंगे और ऐसे भ्रम का शिकार होकर सरकार ने बिना पुख्ता सुरक्षा बन्दोबस्त व योजना के अधिकारीयों को युद्ध स्थल की ओर दौड़ा दिया । जिसके परिणामस्वरूप एक साथ 14 पुलिस जवान मारे गये जबकि सिर्फ एक आतंकवादी को मारा व एक को पकड़ा जा सका ।
    अगर ये नुकसान सरकार द्वारा अल्पसंख्यक आतंकवादियों पर बोले तो जिहादियों पर गोली न चलाने के मौखिक आदेश या आधुनिक हथियार व जैकेट न होने की वजह से हुआ तो फिर इसके लिए जिम्मेवार नेताओं को चौराहे पर खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए ।
    अपना तो स्पष्ट मानना है कि सरकार के मुस्लिम जिहाद समर्थक रूख के कारण ही पुलिस के इतने जवानों को अपनी जान गवानी पड़ी है। जिस तरह शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के मुठभेड़ में मारे जाने के बावजूद मुठभेड़ पर देशद्रोही सैकुलर नेताओं द्वारा प्रश्न उठाये गए ऐसे में कोई जवान मुस्लिम आतंकवादियों पर गोली चलाने से पहले सौ बार सोचता । हमारे विचार में पुलिस जवानों के मन में गोली चलाने और न चलाने का ये उधेड़बुन व अत्याधुनिक हथियारों का अभाव भी उनके कत्ल होने का कारण बना ।
    आपने देखा है कि जब-जब भी पुलिस के जवानों ने जान-माल की हानि होने से पहले ही जिहादी आतंकवादीयों को मुठभेड़ में मार गिराने में सफलता हासिल की है तब-तब इन गद्दारों के सैकुलर गिरोह ने पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही पर शंका प्रकट कर पुलिस के हौसले को तोड़ा है । ये मुठभेड़ चाहे कहीं भी हुई हो ।आपराध समर्थक मीडिया ने मारे जाने वाले अपराधियों के पक्ष में महौल बनाकर पुलिसबलों पर आरोप लगाकर उनका हौसला तोड़ने का अभियान चलाया ।
    आपको याद होगा कि किस तरह सोराबुद्दीन मामले में दो प्रखर राष्ट्रभक्त अधिकारियों को इस दुर्दांत आतंकवादी को मार गिराने के बाद प्रताड़ित किया गया । इस जिहादी को आम निर्दोष मुसलमान बताकर पुलिस अधिकारीयों को अपराधी प्रचारित किया गया । आप जरा सोचो कि जिस व्यक्ति के पास दर्जनों हैंडगरनेड व ए के-47 हों उसे अगर निर्दोष कहा जाए तो फिर अपराधी कौन ?
    ऐसे महौल में कौन पुलिस वाला जिहादियों को मार कर अपना मान-सम्मान, नौकरी ,परिवार सब दाव पर लगायेगा । हमारे विचार में सरकार का यही दबाव इतने अधिक पुलिस जवानों की मौत का कारण बना !
    इस देशविरोधी जिहाद समर्थक महौल को बदलना पड़ेगा । बदलना होगा-बदलना होगा यही नारे बुला रहे थे इन जिहादी आतंकवादियों से दुखी लोग । इसे बदलने का काम सिर्फ देशभक्त जनता ही कर सकती है देशभक्त जनता को चाहिए कि जिहादियों के पक्ष में बोलने वाले नेत्ताओं ,पत्रकारों ,अधिकारियों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों को देखते ही उन पर टूट पड़े मौके पर डांग,पत्थर या बंदूक जो भी हाथ लगे उसी से इनके नाक मुंह तोड़ दे । अगर कुछ भी न मिले तो कम से कम ऐसे गद्दारों के प्रति मुँह कर थूक दे या उन पर अपना जूता ही फैंक दें ताकि इनको अपने किए का एहसास हो सके और ये दोबारा इन कातिल जिहादियों का समर्थन या बचाव करने का दुससाहस न कर सकें !
    यहाँ पर एक बात जो चौंका देने वाली है वो ये है कि जब जवान जिहादियों से लोहा ले रहे थे, शहीद हो रहे थे, इस सारी प्रक्रिया में पुलिस प्रमुख हसन गफूर व ए.एन राय कहां थे ?
    इनकी भूमिका इसलिए और भी गम्भीर हो जाती है कि इस हमले में शुरू में कम से कम 50 जिहादियों ने हिस्सा लिया जो सेना के आने से पहले कहाँ गायब हो गए ऊपर से ये बचकाना ब्यान कि ये सब बिना स्थानीय सहायता से हुआ । इस तरह के हमलों के किसी भी जानकार से आप पता कर सकते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर इतना व्यवस्थित हमला स्थानीय गद्दारों की सहायता के बिना हो ही नहीं सकता ।
    हाँ यहां हम इस महाराष्ट्र पुलिस को ये बता देना चाहते हैं कि कुछ चैनलों व समाचारपत्रों द्वारा ये बताया गया था कि ये काम हिन्दू आतंकवादियों का हो सकता है क्योंकि आतंकवादियों ने हाथों में कंगन पहने हुए थे व उनके पास हिन्दू नामों से पहचान पत्र मिले थे ।
    उर्दू प्रैस द्वारा लगातार मुस्लिम आतंकवादियों व पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने के लिए बार-बार यह झूठ दोहराया जा रहा है कि ये हमला सरकार के सहयोग से हिन्दुओं व उनके संगठनों ने किया है।

    हमारे विचार में ये आतंकवादी हमले की जाँच का रूख हिन्दुओं की ओर मोड़ने का बिल्कुल वैसा ही षड्यन्त्र है जैसा इन मुस्लिम जिहादियों ने सिमी के कार्यालय के बाहर बम्ब विस्फोट वाली जगह पर साध्वी जी की बेची हुई बाइक छोड़ कर ( ये बाइक सुनील जोशी जी को बेची गई थी जिनको सिमी के जिहादियों ने शहीद कर दिया था तब जिहादी ये बाइक अपने साथ ले गये होंगे) किया था।
    रही बात गुलाम प्रधानमन्त्री के इस दबाब की कि सुरक्षाबलों को अल्पसंख्यकों का विस्वास जीतना जरूरी है तो हम आपको बता दें कि इन अल्पसंख्यकों का विस्वास आप तभी जीत सकते है जब देश में मुस्लिम जिहादियों द्वारा किये गये हर हमले के बाद आप 10-20 हिन्दुओं को जेल में डाल दें या फिर हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों की जगह आप ही हलाल कर दें ।
    आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले द्वारा दिया गया वो ब्यान देख लें जिसके अनुसार पुलिस अधिकारियों का कत्ल मुस्लिम जिहादियों ने नहीं हिन्दुओं ने किया है ।(सोचो जरा अगर ये हमला इस तरह खुलम-खुल्ला न होकर चुपके से किया गया होता और करने वाले भागने में सफल हो जोते जैसे अक्सर होता है तो आप हिन्दू संगठनों के पीछे लग जाते कि नहीं क्योंकि सरकारी दबाब भी इसी दिशा में होता)
    अन्तुले ने जो कुछ कहा उससे तो लगता है कि मुस्लिम जिहादियों द्वारा किए जाने वाले हमलों व इन हमलों में मारे जाने वाले लोगों की जानकारी अन्तुले व अन्तुले जैसे मुस्लिम आतंकबाद समर्थक इन हिन्दूबिरोधी सैकुलर नेताओं के पास पहले से आ जाती है । हमारे विचार में पुलिस अंतुले को हिरासत में लेकर उसका नार्को टैस्ट करवाकर असानी से ये पता लगा सकती है कि अंतुले का इस मुस्लिम आतंकवादी हमले से क्या सबन्ध था और इन आतंकवादियों के स्थानीय सहयोगी गद्दार कौन-कौन थे । जिस तरह से सरकार ने अंतुले का बचाब किया है उससे एक बात तो सपष्ट हो जाती है कि ईतना बढ़ा आतंकवादी हमला हो जाने के बाबजूद सरकार के मुस्लिम आतंकबाद समर्थक रूख में कोई बदलाब नहीं आया है ।
    मेरे प्यारे जवानों हम समझ सकते हैं कि आतंकवाद समर्थक सरकार के होते हुए मुस्लिम आतंकबादियों के विरूद्ध कार्यवाही करना असान नहीं पर कम से कम निर्दोष हिन्दुओं को तो बदनाम न करो । क्यों ऐसा करके आप अपनी व हिन्दुओं की जान को खतरे में डाल रहे हैं ?
    इतना सबकुछ होने के बाद भी अगर आपको लगता है कि पकड़े गये हिन्दू निर्दोष क्राँतिकारी देशभक्त नहीं आतंकवादी है तो बिना कोई वक्त गवाये उनको गोली मार दो फाँसी दे दो। परन्तु इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सरकार की कठपुतली बनकर अपनी रक्षक भारतीय सेना व अपनी रीड़ की हड्डी हिन्दू संगठनों को बदनाम कर संसार में मानवता की आधार सनातन भारतीय संस्कृति को नीचा न दिखाओ ।
    इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दू आपस में लड़े हैं तब-तब उन पर जिहादियों ने और जोर से हमला बोला है। ये हमला उसी का तत्कालिक उदाहरण है न सरकार निर्दोष हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ओछे हथकण्डे अपनाती, न सुरक्षाबलों का ध्यान असली आतंकवादियों से हटता, न जवानों की जान जाती, न सरकार इस बहाने ईसाई विदेशी खुफिया एजेंसी को जाँच के बहाने हिन्दूराष्ट्र भारत में बुला पाती ।
    हालांकी हम अमेरिका द्वारा बाकी जगह जिहादियों के विरूद्ध लड़ी जा रही लड़ाई का समर्थन करते हैं पर ये बात भी उतनी ही सत्य है कि तालिबान इसी अमेरिका के सहयोग से आगे बढ़ा है । अमेरिका का एकमात्र उद्देशय अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना है। ईसाईयत का प्रचार-प्रसार इन अमेरिकी हितों का प्रमुख हिस्सा है। सरकार द्वारा एफ वी आई को भारत में काम करने देना देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए गंभीर खतरा है ।
    अगर सरकार ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मुस्लिम जिहादी आतंकवाद का मुकाबला करने में आसमर्थ हैं तो हम सरकार को बता देना चाहते हैं कि भारत में बढ़ता जिहादी आंतक इस देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की हिन्दुविरोधी नीतियों का दुष्परिणाम है न कि सुरक्षा एजेंसियों की असफलता का ।
    क्योंकि इस गिरोह की सरकार ने सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यकों की रक्षा के बहाने न केवल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से रोका है बल्कि पोटा जैसे आतंकवाद विरोधी कानून हटाकर व सच्चर कमेटी से मुसलमानों से होने वाले काल्पनिक भेदभाव की रिपोर्ट दिलवाकर जिहादियों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने में तकनीकी मदद भी की है ।
    रही बात गरीबी की तो कौन नहीं जानता कि आज भी भारत में 40 करोड़ हिन्दू गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें से 20 करोड़ को तो दो वक्त की रोटी मिलना भी तय नहीं होता । इस सब में ये भ्रम फैलाना कि सिर्फ मुसलमान ही गरीब हैं ।इस सरकार की साँप्रदायिक सोच व नीचता का परिचायक है। ये सरकार की विभाजनकारी हिन्दुविरोधी सोच का स्पष्ट उदाहरण है। क्योंकि देश में जितने हिन्दू पिछड़े हुए हैं, गरीब हैं, आत्महत्या करने को मजबूर हैं उतनी तो मुसलमानों की कुल संख्या नहीं है !
    हम सरकार से यही कहेंगे कि विदेशी ईसाई एजैंसियो को भारत में काम करने की छूट देकर सरकार ने न केवल देश को खतरे मे डाला है बल्कि अपने देशविरोधी-हिन्दुविरोधी होने का एक और प्रमाण भारतीय जनता को दे दिया है।
    इन ईसाई एजेंसियों को यदि यथाशीघ्र देश के बाहर न किया गया तो जिहादी हमलों के साथ-साथ चर्च प्रेरित हमले व धर्मांतरण भी तेज हो सकता है क्योंकि ये किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भारत में ईसाईयों की हिन्दुविरोधी सारी गतिविधियां इन्हीं ईसाई देशों के सहयोग से चल रही हैं और इन ईसाई देशों का मानवाधिकार के बहाने भारत के जिहादी व देशविरोधी गुटों को कहीं न कहीं समर्थन रहा है।
    इन ईसाई देशों के सहयोग से व जिहादसमर्थक मुस्लिम देशों की आर्थिक मदद से आज भारत में दर्जनों जाली मानवधिकार संगठन बोले तो जिहादी आतंकवादी दानवाधिकार संगठन , सैंकड़ों देशविरोधी एन जी ओ और हजारों गद्दार समाजिक कार्यकर्त्ता व मीडिया कर्मी और दर्जनों हिन्दू विरोधी चैनल जगह-जगह हिन्दुविरोधी देशतोड़क कामों में लगे हुए हैं ।
    सरकार को अगर कुछ सीखना है तो अमेरिकीयों से अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति प्यार और समर्पण सीखे । अपनों की जान जाने पर किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं वो सीखे । उनसे देशभक्ति सीखे । देश की रक्षा कैसे करते हैं वो सीखे । अगर सीखना ही है तो आतंकवादी विरोधी कानून बनाना सीखे ।
    पर ये सरकार ये सब खाक सीखेगी ये गद्दारों की वो सरकार है जो देशभक्तों के मरने पर खुशियां मनाती है भारतीयों को मारने वाले आतंकवादियों के विरूद्ध काम करने वाले हिन्दुओं को जेल में डालती है ।उनके कपड़े उतरवाने की धमकी देती है, उनकी जूतों से पिटाई करवाती है और देशभक्तों का कत्ल करने वालों को अपना भाई बताती है।
    आज अमेरिका दुनिया को जितना मर्जी धर्मनिर्पेक्षता का पाठ पढ़ाये पर खुद अमेरिका आज भी एक ईसाई देश है वहां भी अन्य संप्रदायों के लोग रहते हैं। पर क्या कभी अमेरिका ने ईसाईयों को अपने मूल अधिकारों से वंचित कर अन्य संप्रदायों को विशेषाधिकार दिए हैं ? जैसे भारत में हिन्दुओं को मूल अधिकारों से वंचित कर मुसलमानों और ईसाईयों को विशेषाधिकार दिए जा रहे हैं ।
    भारत का सारा मीडिया अमेरिका में ओबामा की जीत पर जश्न मना रहा था पर जिस बात को सीखने की जरूरत है वो ये है कि ओबामा ने जीतने के एकदम बाद सबसे पहले चर्च का धन्यावाद किया । अमेरिकी राष्ट्रपति बाईबल पर हाथ रखकर शपथ ग्रहण करता है।
    आज भी अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला कर्तव्य चर्च की रक्षा करना है । परन्तु भारत में अगर कोई प्रधानमन्त्री या व्यक्ति मन्दिर की बात करता है तो भारत के जिहादी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्षतावादियों के पेट में दर्द पड़ जाता है उसमें सांप्रदायिकता नजर आती है ।
    पिछले दिनों अमेरिका में चर्चों में बच्चों के यौन शोषण(ऐसा करने वालों को इन्सान कहना भी पाप है) की बात आई। क्या वहाँ के मीडिया ने ईसाई धर्म-गुरूओं के बारे में उस तरह का गाली-गलौच किया जितना भारत का मीडिया उन हिन्दूधर्म गुरूओं के बारे में करता रहता है जो हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को उजागर करते हैं व भारतीय सभ्यता संस्कृति का प्रचार प्रसार करने में लगे हैं ।
    कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक वो अपनी सभ्यता संस्कृति का सम्मान नहीं करता। अगर आज अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है तो इसी वजह से कि उसने अपनी सभ्यता और संस्कृति पर आक्रमण करने वाले को मौत के घाट उतार कर ही दम लिया है ।
    आज वक्त आ गया है कि हम भारतीय आत्मघाती शाँति की बात करना छोड़ कर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विरोधियों पर सीधा हमला बोलने की आदत डालें और उसे मौत के घाट उतार कर दम लें ।
     
  5. Indian Tiger

    Indian Tiger Lieutenant FULL MEMBER

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    Ramdev protests spread to Nepal

    Kathmandu: Protests began in neighbouring Nepal's capital Monday after the Indian police abruptly ended the fast undertaken by yoga guru Baba Ramdev in the Indian capital New Delhi.

    The Patanjali Yog Kendra established in Kathmandu by the yoga teacher, whose fans number millions in India and abroad, Monday took out a silent protest rally from the Indian Embassy in Kathmandu to the foreign ministry office nearby, condemning the police eviction in New Delhi.

    Protesters, including officials of the Yog Kendras and students, had sought to hold a meet at a public hall in the neighbourhood Monday but were prevented by police who surrounded the venue and prevented them from leaving.

    The detained officials then called up Nepal's Prime Minister Jhala Nath Khanal asking him to intervene. The premier consulted his Home Minister Krishna Bahadur Mahara and then permitted the protesters to convey their grievances in a restrained manner to the Indian Embassy and the foreign ministry.

    Seven members from the Yog Kendra then handed over memorandums to the embassy and foreign ministry, saying that the Nepal chapter was extending moral support to Ramdev's fight against corruption and was condemning the Indian government's attempt to suppress it.

    The general feeling in Nepal is that the Indian police acted ham-handedly by forcibly breaking up a peaceful protest against corruption undertaken by Ramdev.

    'It was not right. The government should have gone deep into Ramdev's demands and seen how much of it could be implemented and drawn up a time frame in consultation with him. When someone seeks a change in society, it is imperative to know what is the root cause of the demand,' said Swami Prem Krishna, a follower of another Indian guru, Osho.

    Baba Ramdev's campaign, termed by many critics as a gimmick, is being closely followed in Nepal.

    Ramdev has yoga centres spread across all 75 districts of Nepal that employ more than 5,000 teachers and 27 ayurvedic centres selling herb-based medicines. Thousands of people in Nepal, including Nepal's leading politicians, actors and captains of industry, follow his yoga instructions and flock to his yoga centres.

    Last year, Ramdev held yoga camps in Nepal and was hailed by the President of Nepal, Ram Baran Yadav, with Pushpa Kamal Dahal Prachanda, former prime minister and Maoist chief, attending one of the early morning sessions.

    Nepal's government has given land to Ramdev at subsidised rates to set up his centres and the Baba, in turn, has gifted the republic 50,000 milch cows to improve the production of milk and agriculture
     
  6. Mr.Ryu

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    Bad Wolf je you are really bad wolf :help: next time please dont post such lengthy posts which cover 2 page in HINDI i can read Hindi but not that fluently as it was my second language in school please TRANSLATE next time je if you can. As an Indian i too need to know what you where telling,

    Thanks je bye :cheers:
     
  7. Mr.Ryu

    Mr.Ryu Captain SENIOR MEMBER

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    Well did not know he has such presence in NEPAL,

    But now it's bad we must have solved it INSIDE our COUNTRY itself for good now it's out of hand,

    This congress messes big every time when it must be solved simply.
     
  8. Bad Wolf

    Bad Wolf Major SENIOR MEMBER

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